-7 डिग्री तापमान, चार दिन बाद भी लाहौल से नहीं निकले 150 लोग
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आखिर जनता के दवाब के आगे बीआरओ को झुकना ही पड़ा है। मौसम खुलने के बाद सोमवार को रोहतांग दर्रा को बहाल करने कर लिए बीआरओ ने अपनी मशीनें तैनात कर दी है। लाहौल की तरफ से कोकसर और मनाली में मढ़ी से बर्फ हटाने का अभियान शुरू हुआ है।
बीआरओ का दावा है कि मौसम अनुकूल रहा तो दो दिन की भीतर रोहतांग दर्रा वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल कर दिया जाएगा। घाटी में अचानक हुई भारी बर्फबारी के कारण लाहौल में विभिन्न जगहों पर फंसे करीब150 लोगों को चार दिन बाद भी राहत नहीं मिल सकी है।
रोहतांग दर्रा के बंद होने से कुछ लोग रोहतांग से सटे कोकसर में रेस्क्यू पोस्ट, घेपन स्टे होम आदि में शरण लिए हुए हैं। जहां दिन का तापमान शून्य से 7 डिग्री नीचे चल रहा है।
बीआरओ के कमांडर कर्नल एसके अवस्थी ने बताया कि लाहौल-स्पीति प्रशासन की ओर से बीआरओ को रोहतांग बहाली के लिए पत्र मिला है। जिसमें घाटी के भीतर कई लोगों के फंसने का जिक्र किया गया है।
दोबारा नहीं खुलेगा दर्रा
वहीं बीआरओ 70 आरसीसी के ऑफिसर इन कमांड लेफ्टिनेंट कर्नल विजय कुमार ने बताया कि बर्फ हटाने के लिए कोकसर और मढ़ी में रोलवा, जेसीबी और स्नो कट्टर तैनात कर दिए हैं।
उधर,लाहौल के इकलौते छुरपक पेट्रोल पंप में पेट्रोल व डीजल का भंडारण भी खत्म हो गया है। जिससे वाहन चालकों की दिक्कते बढ़ गई है।
डीसी देवा सिंह नेगी ने बताया कि बीआरओ के साथ तालमेल बिठा कर रोहतांग दर्रा बहाल करने का प्रयास जारी है। दर्रा बहाल होते ही घाटी में फंसे बाहरी लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रेस्क्यू किया जाएगा।
बीआरओ दीपक प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता मोहन लाल ने बताया कि रोहतांग बहाल करने के लिए बीआरओ ने अपनी पूरी मशीनरी तैनात कर दी है। लेकिन इसके बाद अगर फिर बर्फबारी से रोहतांग बंद होता है तो बीआरओ इसे फिर से बहाल नहीं करेगा।