डिजिटल लर्निंग: जुलाई में नंबर वन, सितंबर में सातवें स्थान पर लुढ़का हिमाचल, हरियाणा-पंजाब ने बनाई बढ़त
केंद्र सरकार की कर्मयोगी रैंकिंग में हिमाचल प्रदेश को बड़ा झटका लगा है। जुलाई में 51.56 अंकों के साथ देशभर में पहले स्थान पर रहा प्रदेश सितंबर में 51 अंक के साथ सातवें स्थान पर पहुंच गया। हरियाणा और पंजाब ने शानदार प्रदर्शन करते हुए हिमाचल को पीछे छोड़ दिया है।
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केंद्र सरकार के कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर जुलाई में देशभर में शीर्ष स्थान हासिल करने वाला हिमाचल दो महीने में छह पायदान नीचे खिसक गया है। सितंबर 2026 की ताजा रैंकिंग में प्रदेश को मध्यम आकार के राज्यों की श्रेणी (कैटेगरी-बी) में सातवां स्थान मिला है। जुलाई में 51.56 कंपोजिट स्कोर के साथ पहले स्थान पर रहने वाले हिमाचल का स्कोर सितंबर में घटकर 51 अंक रह गया है।
वहीं, पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब ने शानदार बढ़त बनाते हुए प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है। उत्तराखंड भी मामूली अंतर से हिमाचल से आगे निकल गया है। केंद्र सरकार के मिशन कर्मयोगी के तहत संचालित कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर जारी यह रैंकिंग सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की डिजिटल लर्निंग, प्रशिक्षण में भागीदारी और क्षमता निर्माण से जुड़ी गतिविधियों के आधार पर तैयार की जाती है। जुलाई में प्रदेश ने 51.56 अंकों के साथ गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया था। उस समय गुजरात 51.18 अंकों के साथ दूसरे और कर्नाटक 40.47 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर था।
पंजाब 40.06 अंकों के साथ पांचवें, उत्तराखंड 34.49 अंकों के साथ छठे और हरियाणा 30.71 अंकों के साथ दसवें स्थान पर था। लेकिन सितंबर की रैंकिंग में हरियाणा ने 60.03 अंकों के साथ पहला और पंजाब ने 60 अंकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया। उत्तराखंड 51.03 अंकों के साथ छठे स्थान पर पहुंच गया, जबकि हिमाचल 51 अंकों के साथ सातवें स्थान पर रहा। रैंकिंग में आई इस गिरावट के बीच प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों की डिजिटल लर्निंग और व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं।
कार्मिक विभाग की ओर से प्रदेश कैडर के सभी आईएएस अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। हर आईएएस अधिकारी को प्रतिमाह एक घंटा कर्मयोगी पोर्टल पर डिजिटल लर्निंग के लिए देना अनिवार्य होगा। पद, कार्यक्षेत्र और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चुनकर उन्हें नियमित रूप से पूरा भी करना होगा। साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार की योजना डिजिटल प्रशिक्षण को केवल आईएएस और वरिष्ठ अधिकारियों तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि इसे प्रशासन के जमीनी स्तर तक पहुंचाने की है। इसके तहत प्रदेश के सभी फ्रंटलाइन और फील्ड कर्मचारियों को भी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। 31 अक्तूबर तक ऐसे कर्मचारियों की कुल संख्या का ब्योरा केंद्र सरकार को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल प्रशिक्षण को अधिक उपयोगी और व्यावहारिक बनाने के लिए हिमाचल सरकार अब राज्य की प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप विशेष पाठ्यक्रम तैयार करवाएगी। इन पाठ्यक्रमों में प्रशासनिक नियमों, सरकारी योजनाओं, विभागीय प्रक्रियाओं और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़े विषय शामिल किए जाएंगे।