HP High Court: जैविक संसाधनों को बिना मंजूरी इस्तेमाल करने पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त
प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के जैविक संसाधनों को बिना मंजूरी इस्तेमाल करने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि संबंधित कंपनियों को जैविक विविधता अधिनियम के अनुरूप नोटिस जारी किए जाए।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के जैविक संसाधनों को बिना मंजूरी इस्तेमाल करने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि संबंधित कंपनियों को जैविक विविधता अधिनियम के अनुरूप नोटिस जारी किए जाए। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार की ओर से संबंधित कंपनियों को जैविक विविधता अधिनियम की धारा 7 के तहत नोटिस जारी किया जा रहा है। जबकि, अधिनियम की धारा 23 और 24 के तहत राज्य जैव विविधता बोर्ड से अनुमति लेने का प्रावधान है। यदि कोई कंपनी जैविक संसाधनों को बिना स्वीकृति इस्तेमाल करती है तो उस स्थिति में अधिनियम की धारा 56 के तहत एक लाख रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
याचिकाकर्ता ने अदालत को सुझाव दिया है कि राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले नोटिस में ये सारे आदेश होने चाहिए। संबंधित कंपनियों को आदेश दिए जाए कि प्रदेश के जैविक संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए राज्य जैव विविधता बोर्ड से स्वीकृति ली जाए। इस मामले में पीपल फॉर रिस्पॉन्सिबल गवर्नेंस ने जैविक विविधता अधिनियम 2002 के कार्यान्वयन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में पूरी तरह से विफल रही है। यह अधिनियम राज्य को स्वयं के जैविक संसाधनों का उपयोग करने के लिये उनके संप्रभु अधिकारों को मान्यता प्रदान करता है। अधिनियम ने जैव संसाधनों तक पहुंच और विनियमित करने के लिये त्रिस्तरीय संरचना का प्रावधान किया गया है। इसमें राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश ने कर्मचारियों के लिए वर्क स्टेशनों का किया उद्घाटन
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एए सैयद ने शुक्रवार को वर्क स्टेशनों का उद्घाटन किया। इन वर्क स्टेशनों को न्यायाधीशों के कर्मचारियों के लिए बनाया गया है। इस अवसर पर न्यायमूर्ति सबीना, न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान, न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल, न्यायमूर्ति संदीप शर्मा, न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवल दुआ, न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य, न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा और न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह उपस्थित रहे। न्यायालयों के कर्मचारियों के उचित बैठने के लिए जगह की कमी की समस्या को हल करने के लिए इन्हें बनाया गया है।
मुख्य न्यायाधीश ने न्यायालय को आरामदायक और सौहार्दपूर्ण वातावरण प्रदान करने के लिए वर्क स्टेशनों की स्थापना को उचित समझा और इसके लिए मौजूदा उच्च न्यायालय भवन में मुरम्मत और मुरम्मत कार्य करने का आदेश दिया। अनूप कुमार रतन महाधिवक्ता, अंकुश दास सूद अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, उप सॉलिसिटर जनरल बल राम शर्मा और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश ने रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्रार (प्रशासन) और लोक निर्माण विभाग के प्रयासों की सराहना की। इन्होंने कोर्ट स्टाफ को समायोजित करने के लिए मौजूदा ढांचे के नवीनीकरण और कार्य स्टेशनों की स्थापना के कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए भरसक प्रयास किए।