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वन भूमि में सेब बगीचे लगाने पर स्टेटस रिपोर्ट तलब
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 16 Dec 2015 12:11 AM IST
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प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी वन भूमि से पेड़ काट कर सेब के बगीचे अवैध तरीके से विकसित करने के मामले में राजस्व विभाग से ताजा स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए।
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राज्य सरकार की कार्रवाई के बाद कोर्ट मित्र ने बताया कि फारेस्ट विभाग द्वारा दायर शपथ पत्र के अनुसार काफी लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली हैं। अवैध तरीके से कब्जे में ली भूमि को छुड़ा लिया है लेकिन अभी भी कई लोग अवैध भूमि पर कब्जा जमाए हुए बैठे हैं।
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इनके खिलाफ कार्रवाई होना बाकी है। प्रार्थी ने कोर्ट से आग्रह किया है कि ताजा रिपोर्ट के माध्यम से बचे हुए अवैध कब्जाधारियों के बारे में विस्तृत जानकारी ली जाए। इसके अलावा मांग की गई है कि अवैध कब्जाधारियों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाए ताकि भविष्य में कोई सरकारी भूमि पर कब्जा जमाने की हिमाकत न कर सके।
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प्रार्थी के अनुसार अब चूंकि सेब सीजन समाप्त हो चुका है इसलिए पेड़ो के काटने बाबत पारित कोर्ट पिछले आदेशों का पालन सख्ती से करवाया जाये और जिन अधिकारियों व कर्मचारियों ने अवैध कब्जों को उजागर करने बाबत कोताही बरती उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही चलाने के आदेश पारित किये जाएं।
प्रार्थी ने वन विभाग द्वारा पिछले शपथ पत्र का हवाला देते हुए मांग की थी कि सेबों के ऑक्शन से जुटाई गयी कुल राशि का विवरण कोर्ट को बताया जाये हालाँकि वन विभाग ने 55 लाख की राशि 15 सितंबर तक एकत्र कर लेने की बात बताई थी लेकिन ताजा स्टेटस रिपोर्ट में वन विभाग ने इस बारे में कोई नई जानकारी नहीं दी।
कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को कोर्ट मित्र द्वारा दिए सुझाव पर अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने के आदेश जारी किए। मामले पर सुनवाई 30 दिसंबर को होगी।
अस्पतालों की डाइट पर रिपोर्ट तलब- प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में अच्छी व स्वच्छ डाइट मुहैया करवाने के आग्रह को लेकर दायर याचिका में सरकारी रिपोर्ट को यह कह कर लौटा दिया कि यह रिपोर्ट कोर्ट के आदेशों के अनुसार नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने राज्य सरकार को 2 जनवरी तक ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकार की आधी अधूरी रिपोर्ट पर खेद जताया।
गौरतलब है कि प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के अस्पतालों में मरीजों को परोसी जा रही घटिया डाइट के सदर्भ में स्वत: संज्ञान लेने के बाद सरकार से इस बाबत स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी। मामले पर सुनवाई 2 जनवरी को होगी।