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हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा, कार्यवाहक वीसी की नियुक्ति के लिए वरिष्ठता अनिवार्य नहीं

Sat, 03 Jan 2026 12:41 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 03 Jan 2026 12:41 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा है कि कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति के लिए केवल वरिष्ठतम होना ही एकमात्र आधार नहीं है। 

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Himachal: High Court said, seniority is not mandatory for appointment of acting VC.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। कोर्ट ने कहा है कि कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति के लिए केवल वरिष्ठतम होना ही एकमात्र आधार नहीं है। कानून के अनुसार चांसलर (कुलाधिपति) वरिष्ठ संकाय सदस्यों में से किसी को भी इस पद के लिए चुनने का अधिकार रखते हैं। विवि अधिनियम के तहत कुलपति की अनुपस्थिति में वरिष्ठतम फैकल्टी को ही कार्यभार देना अनिवार्य नहीं है, बल्कि वरिष्ठ संकाय सदस्यों में से किसी को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।

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न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1986 की धारा 24(5) की व्याख्या करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि विधायिका की मंशा केवल सबसे वरिष्ठ सदस्य को नियुक्त करने की होती तो कानून में सीनियर मोस्ट शब्द का प्रयोग किया जाता। अधिनियम में वरिष्ठ संकाय सदस्यों में से वाक्यांश का प्रयोग किया गया है। अधिनियम की धारा 24(5) कुलाधिपति को शक्ति देती है कि वे वरिष्ठ सदस्यों के समूह में से जिसे उचित समझें, उसे अस्थायी प्रभार सौंप सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की व्याख्या को स्वीकार करना नियमों को फिर से लिखने जैसा होगा, जिसकी अनुमति कानून नहीं देता।

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अदालत ने कहा कि कार्यवाहक कुलपति के रूप में किसी जूनियर (जो वरिष्ठ संकाय का हिस्सा हो) की नियुक्ति का अर्थ यह नहीं है कि वरिष्ठ प्रोफेसर नियमित नियुक्ति के लिए अयोग्य हो गए हैं। नियमित कुलपति का चयन एक चयन समिति की ओर से किया जाता है, जिसमें कुलाधिपति स्वयं सदस्य नहीं होते। विधायिका का इरादा केवल सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर को नियुक्त करने का होता, तो कानून में स्पष्ट रूप से वरिष्ठतम शब्द का उपयोग किया जाता। अदालत ने अन्य पदों (जैसे कॉलेजों के डीन) का उदाहरण दिया, जहां नियमों में स्पष्ट रूप से वरिष्ठतम प्रोफेसर की नियुक्ति का प्रावधान है। धारा 24 (5) में इस शब्द का अभाव चांसलर को अपने विवेक का उपयोग करने की शक्ति देता है। वरिष्ठतम प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार कपिला ने याचिका दायर कर कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति को चुनौती दी थी। 

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