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हिमाचल: ड्रग्स केस में बरी पूर्व हेड कांस्टेबल बहाल, हाईकोर्ट ने एसपी का आदेश किया रद्द

Mon, 28 Sep 2026 06:51 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 28 Sep 2026 06:51 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने कोटखाई ड्रग्स मामले में बरी हो चुके पूर्व हेड कांस्टेबल दिनेश कुमार की बहाली रोकने वाले शिमला के तत्कालीन एसपी के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को चार हफ्ते में उन्हें सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है।

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Himachal: High Court quashes SP's order to restore service of former head constable in four weeks
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कोटखाई ड्रग्स मामले में बरी हो चुके पूर्व हेड कांस्टेबल दिनेश कुमार की बहाली रोकने वाले शिमला के तत्कालीन एसपी के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को चार हफ्ते में उन्हें सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने जुलाई 2018 से अब तक की बर्खास्तगी अवधि का 50 फीसदी एरियर, वरिष्ठता, प्रमोशन और सभी वित्तीय एवं सेवा लाभ देने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल फैसले में संदेह का लाभ मिलने का उल्लेख होने से किसी की बेगुनाही कम नहीं हो जाती। जब मुख्य आधार ही खत्म हो गया हो तो उस पर जारी बर्खास्तगी का आदेश भी प्रभावी नहीं रह सकता।

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दिनेश कुमार वर्ष 1997 में हिमाचल प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल भर्ती हुए थे और 2011 में हेड कांस्टेबल बने। जनवरी 2016 में कोटखाई थाना में उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। अप्रैल 2018 में स्पेशल जज (फॉरेस्ट) शिमला ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 14 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसी सजा के आधार पर विभाग ने जुलाई 2018 में उन्हें बर्खास्त कर दिया। उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच यह कहते हुए बंद कर दी गई कि अदालत से सजा होने के बाद जांच जारी रखने का औचित्य नहीं है। दिनेश ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की।

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अक्तूबर 2023 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा था। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2025 में खारिज कर दिया। दिनेश ने बहाली के लिए विभाग को प्रतिवेदन दिया। शिमला के तत्कालीन एसपी ने अगस्त 2025 में आवेदन खारिज करते हुए कहा कि भले ही वह अदालत से तकनीकी आधार पर बरी हुए हों, लेकिन विभागीय जांच में मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल होने के सबूत मिले हैं।

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