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शिमला: संजौली के पास बंगला कॉलोनी में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम का वार्ड कार्यालय तोड़ने के आदेश

Mon, 14 Sep 2026 05:31 PM IST
Ankesh Dogra भारती मेहता, शिमला।
भारती मेहता, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 14 Sep 2026 05:31 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली की बंगला कॉलोनी में वन और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले में नगर निगम शिमला को अपने ही वार्ड कार्यालय को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने 23 वन भूमि और 10 निगम भूमि पर बने अवैध ढांचों को हटाने, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और वन भूमि का इंतकाल वन विभाग के नाम दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

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himachal high court orders demolition of shimla municipal corporation ward office in sanjauli
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली के पास स्थित बंगला कॉलोनी में वन और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण, अवैध निर्माण पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए बेहद सख्त आदेश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने नगर निगम शिमला को बिना स्वीकृत नक्शे के बने अपने ही वार्ड कार्यालय को स्वयं ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा भूमि को उसकी मूल स्थिति में बहाल करे।

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अदालत ने वन भूमि पर बने 23 अवैध ढांचों (822.52 वर्ग मीटर) को हटाने के लिए कलेक्टर-कम-डीएफओ के समक्ष लंबित मामलों की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।नगर निगम की अपनी भूमि पर बने अन्य 10 अवैध ढाँचों को हटाने के लिए नियमानुसार बेदखली प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। पीठ ने बिना नक्शा पास कराए और वन भूमि होने के बावजूद जनता के पैसे से भवन का निर्माण व उद्घाटन कराने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय करने के निर्देश दिए है।
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अदालत ने कहा कि रक्षक ही भक्षक बन गए है। पीठ ने लैटिन कहावत (रक्षकों की रक्षा कौन करेगा) का हवाला देते हुए कहा कि जब नियम लागू करने वाली संस्था खुद अनधिकृत निर्माण करेगी,तो इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।अदालत ने निगम की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें इस अनियमितता को नजरअंदाज या नियमित करने की बात कही गई थी।15 अक्टूबर 2013 की अधिसूचना के अनुसार वन भूमि (खसरा नंबर 443, 444 और 1662) का म्यूटेशन (इंतकाल) तुरंत वन विभाग के नाम दर्ज किया जाए। अदालत ने इस मामले में सभी संबंधित विभागों को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

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गौरतलब है कि हाईकोर्ट को शिमला के संजौली वार्ड में स्थित दुर्गा गैस स्टोर के नीचे और एसपीएम स्कूल से सटे बन रहे मैदान के पास बंगला कॉलोनी में वन भूमि पर अतिक्रमण, पक्के पक्के फर्श (सीमेंटिंग), देवदार के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने और कचरा फेंकने/जलाने के संबंध में एक प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था।अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण शिमला के सचिव और एसडीएम शिमला को इसका निरीक्षण करने का आदेश दिया।अदालत के आदेशों की बात डीएलएसए और एसडीएम की ओर से रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें पाया गया कि उक्त क्षेत्र में 23 निर्माण वन भूमि पर और 10 निर्माण नगर निगम की भूमि पर अवैध रूप से किए गए हैं।

रिपोर्ट और हलफनामे के अनुसार, नगर निगम शिमला का वार्ड कार्यालय खसरा नंबर 464 पर बनाया गया है।इसे बिना कोई भवन योजना पास कराए तैयार किया गया। 17 अक्टूबर 2015 को इसका उद्घाटन किया गया था। वर्ष 2013 की अधिसूचना के तहत इस भूमि का स्वामित्व पहले ही वन विभाग को स्थानांतरित किया जा चुका था। इसके बावजूद नगर निगम ने लाखों रुपये की सार्वजनिक धनराशि खर्च करके यहां कार्यालय और सामुदायिक केंद्र/रीडिंग रूम का निर्माण कर दिया है।

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