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शिमला: अवैध कटान मामले में 16 अधिकारियों से 34.68 लाख की वसूली के आदेश

Sat, 24 Apr 2021 10:12 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 24 Apr 2021 10:12 PM IST
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himachal high court Order for recovery of 34.68 lakhs from 16 officers in illegal felling case
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला शिमला की वन रेंज कोटी में 416 पेड़ों के अवैध कटान मामले में प्रधान सचिव वन को 16 वन अधिकारियों से 34 लाख 68 हजार 233 रुपये की वसूली करने के लिए आदेश जारी किए हैं। इन अधिकारियों में दो वन अरण्यपाल, दो मंडल वन अधिकारी, तीन सहायक वन अरण्यपाल, दो रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, छह ब्लॉक ऑफिसर और एक गार्ड शामिल है।

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यह सभी कर्मी भलावाग बीट, कोटी फारेस्ट ब्लॉक, कोटी फारेस्ट रेंज, शिमला फारेस्ट डिवीजन और शिमला फॉरेस्ट सर्किल में साल 2015 से 2018 के बीच तैनात थे। इसी दौरान कोटी रेंज में 416 पेड़ों का अवैध कटान हुआ था।  कोर्ट ने इन अधिकारियों को 27 मई को अदालत में उपस्थित होने का अवसर देते हुए कहा कि यह कर्मी उपरोक्त वसूली और उनके सेवा रिकॉर्ड में उल्लेखित चूक की प्रविष्टि करने से पहले अपनी बात अदालत के समक्ष रख सकते हैं।
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मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी और न्यायमूर्ति अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करने के बाद यह आदेश पारित किए। इस मामले में नियुक्त एमिक्स क्यूरी द्वारा कोर्ट को बताया कि अधिकारियों का यह अनिवार्य कर्तव्य है कि वह अपने अधीन आने वाले क्षेत्र का निरीक्षण करें और पेड़ों की किसी भी कटाई का पता लगाएं। बताया कि विभाग ने उच्च अधिकारियों के खिलाफ  कार्रवाई करने के बजाय केवल उन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ  कार्रवाई शुरू की है जो रैंक में सबसे कम हैं। केवल छोटे वन कर्मियों को ही निशाना बनाया है। 
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पेड़ों की कटाई की भरपाई नहीं की जा सकती 
कोर्ट ने सभी पक्षकारों की दलीलों के सुनने के बाद कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में बेशक काटे पेड़ों की लकड़ी की लागत वसूली होगी लेकिन पेड़ों के मूल्य का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है। पेड़ न केवल ऑक्सीजन उत्पादक हैं बल्कि डी कार्बोनाइजर भी हैं। कोर्ट ने कहा कि जो अधिकारी 100 साल की उम्र के पेड़ों के इस नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं उन्हें दंडित करना होगा। पेड़ों की इस तरह की अवैध कटाई की भरपाई किसी भी तरीके से नहीं की जा सकती है। मामले पर अगली सुनवाई 27 मई को होगी। 

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