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हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, तृतीय श्रेणी कर्मियों को भी मिलेगा वर्कचार्ज स्टेटस

Thu, 24 May 2018 01:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Thu, 24 May 2018 01:42 PM IST
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himachal high court Judgement over work charged status to third class employees
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चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की तरह तृतीय श्रेणी में आने वाले कर्मियों को भी आठ साल के बाद वर्कचार्ज स्टेटस दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने प्रदेश प्रशासनिक प्राधिकरण की ओर से पारित फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वर्कचार्ज स्टेटस केवल वर्कचार्ज स्थापना में ही देना कोई पूर्व निर्धारित शर्त नहीं हो सकती है।
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वर्क इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार ने वर्ष 2013 में हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर कर यह गुहार लगाई थी कि उसे आठ साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वर्कचार्ज स्टेटस देने के आदेश पारित किए जाएं।
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अश्विनी कुमार वर्क इंस्पेक्टर के पद पर दैनिक भोगी के तौर पर वर्ष 1994 में नियुक्त हुआ था। वह वर्ष 2002 से वर्क चार्ज स्टेटस दिए जाने की मांग कर रहा था।

प्रशासनिक प्राधिकरण के फैसले को अदालत ने सही बताया

himachal high court Judgement over work charged status to third class employees

प्रदेश उच्च न्यायालय में अश्विनी कुमार की ओर से दिए प्रतिवेदन पर लोक निर्माण विभाग ने अपना निर्णय देने के आदेश पारित किए थे, मगर लोक निर्माण विभाग ने प्रार्थी के प्रतिवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया था कि एक अप्रैल 2001 से चतुर्थ और तृतीय श्रेणी के कर्मियों के लिए वर्कचार्ज व्यवस्था खत्म हो चुकी है।

इस कारण से आठ साल के बाद वर्कचार्ज स्टेटस का लाभ नहीं दिया जा सकता। प्रार्थी ने इस आदेश को ट्रिब्यूनल के समक्ष याचिका के माध्यम से चुनौती दी। ट्रिब्यूनल ने प्रार्थी के क्लेम को जायज पाते हुए आदेश दिए कि उसे आठ साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वर्कचार्ज स्टेटस दिया जाए।

राज्य सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले में कोई भी खामी न पाते हुए प्रार्थी के मामले को आठ वर्ष के बाद वर्कचार्ज स्टेटस दिए जाने के लिए आदेश पारित कर दिए।

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