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एचआरटीसी कंडक्टर भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Wed, 14 Oct 2015 09:14 AM IST
Updated Wed, 14 Oct 2015 09:14 AM IST
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Himachal high court judgement over conductor recruitment in hrtc.

हिमाचल हाईकोर्ट ने सोमवार को कौशल विकास भत्ते के तहत कंडक्टर भर्ती मामले का निपटारा कर दिया है। विवादों से घिरी कंडक्टर भर्ती में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस योजना के तहत रखे गए प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के दौरान व प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद भर्ती प्रक्रिया से गुजरे बिना तैनात नहीं किया जाएगा।

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मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के जवाब के बाद एक याचिका की सुनवाई पर ये आदेश दिए। एचआरटीसी ने हाईकोर्ट को बताया कि कौशल विकास भत्ते के तहत रखे गए कंडक्टरों की प्रशिक्षण अवधि साढ़े चार महीने से घटाकर ढाई महीने कर दी है।

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फिर शुरू होगा कंडक्टर प्रशिक्षण

Himachal high court judgement over conductor recruitment in hrtc.

इस योजना के तहत रखे गए कंडक्टर को नियुक्ति के लिए उसी प्रक्रिया से गुजरना होगा, जैसी प्रक्रिया नियमित व अनुबंध आधार पर नियुक्ति के लिए अपनाई जाती है। प्रशिक्षण का यह मतलब यह नहीं है कि प्रशिक्षु एचआरटीसी के कर्मचारी हो गए हैं। प्रशिक्षुओं को केवल 15 रुपये प्रति घंटा यानी प्रतिदिन अधिकतम 120 रुपये एचआरटीसी की ओर से दिए जाते हैं।

हाईकोर्ट ने इन तथ्यों के मद्देनजर याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि प्रार्थी ने कौशल विकास भत्ता योजना 2013 को कोई चुनौती नहीं दी है। प्रार्थी चाहे तो इस योजना को चुनौती दे सकता है। प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वह योजना के खिलाफ नहीं है। लेकिन इस योजना की आड़ में एचआरटीसी विज्ञापित 700 सीटों से कहीं अधिक प्रशिक्षु कंडक्टर भर रहा है, जो सरासर नियमों और कानून का उल्लंघन है।

एचआरटीसी में फिर से कंडक्टर प्रशिक्षण शुरू होगा। एचआरटीसी ने कौशल विकास भत्ते के तहत जनवरी 2015 में बेरोजगार युवाओं से कंडक्टर प्रशिक्षण के लिए आवेदन मांगे थे। 9,000 युवाओं ने इसके लिए आवेदन किया था। एचआरटीसी ने पहले चरण में 700 युवाओं का चयन कर प्रशिक्षण देना शुरू किया लेकिन 10 दिन बाद ही मामला हाईकोर्ट ले जाया गया था।

अवमानना पर सीपीआरआई के निदेशक तलब

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प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती आदेशों की अवमानना मामले में सीपीआरआई के निदेशक को 26 अक्तूबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने डॉ टीआर शर्मा की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश दिए। याचिका में आरोप लगाया गया कि केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र (सीपीआरआई) और डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय नौणी ने प्रार्थी को 26 दिन की अरनलीव का भुगतान अदालती आदेशों के बावजूद नहीं किया।

कोर्ट ने 25 जून 2013 को पारित आदेशों में नौणी विश्वविद्यालय को सीपीआरआई से प्रार्थी की अरनलीव का पैसा लेने और दो महीने में इसका भुगतान करने को कहा था। भुगतान न होने पर प्रार्थी ने पहली दफा वर्ष 2014 में अवमानना याचिका दायर की। इसके बाद फिर से अवमानना याचिका दायर की गई, इसमें सीपीआरआई को भी पार्टी बनाया गया। र्हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए उक्त अधिकारी को कोर्ट में तलब किया है।

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एएन शर्मा मामले की सुनवाई 17 नवंबर तक टली

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पूर्व आईपीएस अधिकारी एएन शर्मा की पुन: नियुक्ति मामले में सुनवाई 17 नवंबर तक लिए टल गई है। महाधिवक्ता श्रवण डोगरा के कोर्ट में उपस्थित न होने के कारण मामले पर सुनवाई टली है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर उनके खिलाफ जारी किए गए तलबी आदेशों को चुनौती दे रखी है। निचली अदालत ने धूमल सहित अन्य आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिये थे। धूमल के अनुसार 21 मार्च को तत्कालीन राज्यपाल कल्याण सिंह ने मामला चलाने की कोई इजाजत नहीं दी थी, इसलिए कानून के अनुसार उनके खिलाफ मामला नहीं चलाया जा सकता।

सरकार के अनुसार 28 जनवरी को इसी मामले में तत्कालीन राज्यपाल उर्मिला सिंह ने फाइल यह कहकर वापस कर दी थी कि ऐसे मामलों में अभियोजन मंजूरी की कोई जरूरत नहीं होती। न्यायाधीश राजीव शर्मा ने निचली अदालत की ओर से जारी किए गए तलबी समन पर रोक लगा दी थी।

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