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हिमाचल हाईकोर्ट ने बागपत के डीएम और एसपी को दिया अवमानना का नोटिस

Mon, 02 Aug 2021 10:52 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 02 Aug 2021 10:52 PM IST
सार

न्यायालय ने प्रार्थी की याचिका को स्वीकार करते हुए 29 जून 2020 याचिकाकर्ता को 21 दिनों की अवधि के लिए पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया था। उसके बाद अधीक्षक जेल नाहन ने याचिकाकर्ता को पैरोल पर रिहा करने के संबंध में पुलिस अधीक्षक व जिला मजिस्ट्रेट बागपत से उचित मंजूरी मांगी थी, जिससे उन्होंने इंकार कर दिया था। 

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Himachal High Court gave contempt notice to the DM and SP of Baghpat
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आदेशों की अनुपालना न करने वाले उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को अवमानना नोटिस जारी किया है। उच्च न्यायालय ने दोनों आला अफसरों को 25 अगस्त को तलब भी किया है। कोर्ट ने अपने 29 जून 2020 को पारित आदेशों की अनुपालना न होने पर यह आदेश जारी किए हैं।  न्यायालय ने प्रार्थी की याचिका को स्वीकार करते हुए 29 जून 2020 याचिकाकर्ता को 21 दिनों की अवधि के लिए पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया था।

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उसके बाद अधीक्षक जेल नाहन ने याचिकाकर्ता को पैरोल पर रिहा करने के संबंध में पुलिस अधीक्षक व जिला मजिस्ट्रेट बागपत से उचित मंजूरी मांगी थी, जिससे उन्होंने इंकार कर दिया था।  कोर्ट ने हैरानी जताई कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उक्त आदेश पर अमल नहीं किया गया है। न्यायालय ने बागपत के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की ओर से याचिकाकर्ता को पैरोल पर रिहा करने से इनकार करना कोर्ट के आदेश पर अमल न करना माना। 
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मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने पाया कि हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना करने के लिए मामला प्रदेश पुलिस विभाग ने उत्तर प्रदेश के संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक बागपत के समक्ष उठाया था। उन्होंने न्यायालय के आदेशों के बावजूद अभी भी यह सुनिश्चित नहीं किया है कि याचिकाकर्ता को पैरोल पर रिहा किया जाए।
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 कोर्ट ने आदेशों में स्पष्ट किया था चूंकि याचिकाकर्ता बिजरोले, तहसील बड़ौत, जिला बागपत का निवासी है इसलिए उसे अपने निजी मुचलके के अलावा अपनी मां या अपने परिवार के किसी करीबी सदस्य का जमानती के तौर पर बांड पेश करना होगा। कोर्ट ने 21 दिनों की पैरोल की समाप्ति पर याचिकाकर्ता को जेल अधीक्षक, मॉडल सेंट्रल जेल नाहन के समक्ष आत्मसमर्पण करने के आदेश जारी किए थे।


कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि याचिकाकर्ता पैरोल आदेश की किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है और कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा करता है तो पैरोल रद्द की जा सकती है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में कोर्ट ने प्रथम दृष्ट्या पाया कि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक बागपत दोनों ही जानबूझकर हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए रिहा नहीं करने के दोषी हैं। कोर्ट ने आदेश दिए कि सुनवाई की अगली तारीख पर अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता वाले नोटिस जारी करे। न्यायालय के आदेशों की अनुपालना के लिए आदेश की प्रति फैक्स द्वारा डीजीपी तथा मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को ई मेल द्वारा भेजने के आदेश जारी किए है।

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