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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal High Court: Forcing wife to live in a cowshed and denying her use of the toilet constitutes cruelty.

हिमाचल हाईकोर्ट: पत्नी को गोशाला में रहने के लिए मजबूर करना, शौचालय इस्तेमाल नहीं करने देना क्रूरता

Tue, 29 Sep 2026 07:05 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 29 Sep 2026 07:05 PM IST
सार

 अदालत ने कहा कि पत्नी को घर के शौचालय का उपयोग करने से रोकना और उसे गोशाला (पुराने कमरे) में रहने के लिए मजबूर करना मानसिक व शारीरिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।  न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने मंडी स्थित फैमिली कोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया गया था।

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Himachal High Court: Forcing wife to live in a cowshed and denying her use of the toilet constitutes cruelty.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में पति की याचिका खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि पत्नी को घर के शौचालय का उपयोग करने से रोकना और उसे गोशाला (पुराने कमरे) में रहने के लिए मजबूर करना मानसिक व शारीरिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने मंडी स्थित फैमिली कोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अपनी पत्नी को बुनियादी मानवीय सुविधाओं और शौचालय के इस्तेमाल से रोकना उसकी गरिमा के खिलाफ है। यही वास्तव में पति की ओर से की गई असली क्रूरता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्नी अपनी मर्जी या स्वेच्छा से अलग नहीं रह रही थी, बल्कि पति के अमानवीय व्यवहार एवं परिस्थितियों के कारण अलग रहने पर मजबूर होना पड़ा था।

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शिक्षक ने  पत्नी पर क्रूरता और परित्याग का लगाया था आरोप
पेशे से फिजिकल एजुकेशन टीचर याचिकाकर्ता पति ने अपनी पत्नी पर क्रूरता और परित्याग का आरोप लगाते हुए हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक मांगा था। उसने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी 23 साल से अलग रह रही थी और परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पति खुद नए और बड़े मकान में रह रहा था, जबकि उसने पत्नी को परिसर में स्थित एक पुराने कमरे, गोशाला में रहने पर मजबूर किया था। इतना ही नहीं, पति ने पत्नी को घर के मुख्य शौचालय और वॉशरूम का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया था। इस विवाद को लेकर पूर्व में पुलिस में एक समझौता भी हुआ था।

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