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हाईकोर्ट ने बंद की जेओए भर्ती पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिका

Fri, 16 Mar 2018 12:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Fri, 16 Mar 2018 12:09 PM IST
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Himachal high court disposed off of a PIL for JOA recruitment

हाईकोर्ट ने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के 1421 पदों को भरने में हुई कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर दर्ज जनहित याचिका को बंद करने के आदेश पारित किए हैं।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि यही मामला राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल और अन्य याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है।
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ऐसे में मामले को अदालत के बिना किसी अभिमत के बंद किया जाता है। हाईकोर्ट को लिखे पत्र में कहा गया था कि प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 1421 पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था। इन पदों के लिए परीक्षा लेने के बाद 15 सितंबर, 2017 को परिणाम निकाला गया।
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इन पदों को भरने के लिए शैक्षणिक योग्यता बारहवीं और किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्था से कंप्यूटर की डिग्री या डिप्लोमा रखा गया था। प्रार्थी का आरोप था कि परीक्षा परिणाम घोषित करने के बाद पात्रता की शर्तों को दरकिनार करते हुए अपात्र अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया।

प्रार्थी ने कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती प्रक्रिया पर उठाए थे सवाल

Himachal high court disposed off of a PIL for JOA recruitment

एक कंप्यूटर की दुकान से प्रमाणपत्र हासिल करने वालों को भी जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के पद पर नियुक्त किया गया। प्रार्थी ने इस मामले की जांच करवाई जाने के आदेश दिए जाने बाबत हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। प्रार्थी का यह भी आरोप था कि इन पदों को भरने के लिए साक्षात्कार में भी हेराफेरी की गई।

अपने चहेतों को साक्षात्कार में अधिक अंक देते हुए उनकी नियुक्ति सुनिश्चित की गई। प्रार्थी के अनुसार भारत सरकार ने साक्षात्कार में होने वाली हेराफेरी को रोकने व योग्य लोगों को नियुक्त करने के उद्देश्य से 15 अगस्त 2016 को यह निर्णय लिया था कि तृतीय व चतुर्थ वर्ग के पदों को भरने के लिए साक्षात्कार नहीं रखा जाएगा, फिर भी साक्षात्कारों का आयोजन कर सीधे तौर पर दर्शाता है कि अपने चहेतों को साक्षात्कार के माध्यम से इन पदों पर नियुक्त किया गया।

कोर्ट ने इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए सरकार व कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। कर्मचारी चयन ने अपने जवाब में इन पदों को भरने की विस्तृत प्रक्रिया कोर्ट बताई।

आयोग व सरकार ने यह भी बताया कि इसी मुद्दे से जुड़े मामले ट्रिब्यूनल व हाईकोर्ट में अन्य याचिकाओं के माध्यम से लंबित है। कोर्ट ने सरकार व आयोग के इस वक्तव्य के बाद इस जनहित याचिका को बंद करने के आदेश पारित किए।

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