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गवाहों की वीडियो या ऑडियोग्राफी करें जांच अफसर: हाईकोर्ट

Sat, 02 Jul 2016 10:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 02 Jul 2016 10:18 AM IST
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himachal high court directions to investigating officers
हिमाचल हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में गवाहों के मुकरने के बढ़ते प्रचलन को लेकर सरकार को आदेश दिए कि मामलों की जांच के दौरान जांच अधिकारी गवाहों के बयानों की वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग करें। न्यायाधीश राजीव शर्मा ने चरस तस्करी के एक मामले में सरकार की अपील को मंजूर कर यह आदेश दिए।

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हाईकोर्ट ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को आदेश दिए कि वह सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी करें कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 161 में दर्ज होने वाले बयान कानून की अक्षरश: अनुपालना करवाएं। कहा कि यह न्याय कि दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है कि गवाहों के बयानों से मुकरने के प्रचलन पर काबू पाया जाए।
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अनेकों गवाह पुलिस को दिए बयानों से उस समय मुकर जाते हैं, जब उन्हें अदालत में गवाही को अभियोजन पक्ष से प्रस्तुत किया जाता है। इसका असर यह होता है कि अपराधी अकसर संदेह का लाभ लेते हुए बरी हो जाते हैं। मामले के अनुसार पुलिस ने ज्ञान चंद को 5 जनवरी की रात को शिमला से दिल्ली जाने वाली हरियाणा रोडवेज की बस में 3 किलो 300 ग्राम चरस ले जाते हुए पकड़ा।
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अभियोजन पक्ष ने जांच के बाद कुल 14 गवाह विशेष न्यायाधीश सोलन के समक्ष पेश कर दोष साबित करने की कोशिश की। मामले की जांच से जुड़े कुछ पुलिस कर्मी और हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी अपने पुलिस को दिए बयानों से मुकर गए और अपराधी छूट गया। सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, इसे मंजूर कर कोर्ट ने सरकार को यह आदेश दिए।

चरस रखने पर चार साल का कठोर कारावास

himachal high court directions to investigating officers

हाईकोर्ट ने 810 ग्राम चरस के साथ पकड़े दोषी सुरजीत कुमार को 4 वर्ष कठोर कारावास और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सीबी बरोवालिया ने विशेष न्यायाधीश सोलन के फैसले को पलटते हुए यह आदेश जारी किए। मामले के अनुसार 12 अप्रैल, 2008 को पुलिस ने कराड़ाघाट में पेट्रोलिंग के दौरान दोषी सुरजीत कुमार को 810

ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया था। उस समय उसकी उम्र महज 23 साल थी। 10 गवाहों को कोर्ट में पेश करने के बावजूद अभियोजन पक्ष निचली अदालत में दोषी का दोष साबित नहीं कर पाया था। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ  सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने दोषी को यह सजा सुनाई है।

अफीम के साथ पकड़े आरोपी पर फैसला सात को

हाईकोर्ट ने 1500 ग्राम अफीम के साथ पकड़े आरोपी बुधराम को मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाया है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने विशेष न्यायाधीश फास्ट ट्रैक मंडी के फैसले को पलटते हुए यह आदेश जारी किए। मामले के अनुसार 7 जनवरी 2010 को पुलिस ने सदर मंडी में पेट्रोलिंग और नाकेबंदी के दौरान दोषी बुधराम

को 1500 ग्राम अफीम के साथ गिरफ्तार किया था। 11 गवाहों को कोर्ट में पेश करने के बावजूद अभियोजन पक्ष निचली अदालत में दोषी का दोष साबित नहीं कर पाया था। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ  सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने दोषी को इस मामले में 7 जुलाई 16 को सजा सुनाने का फैसला सुनाया है।

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