कांग्रेस में घमासान, कौल बोले- विक्रमादित्य ने क्या पिता से पूछ कर दिया बयान
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यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह के एक परिवार से एक टिकट के बयान पर कांग्रेस में घमासान मच गया है। वीरवार को हमीरपुर में पत्रकार वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि विक्रमादित्य बताएं कि क्या उन्होंने अपने पिता से पूछकर यह बयान दिया है।
कौल ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह ने जो कहा, उस तरह का कांग्रेस में कोई नियम नहीं। वीरभद्र सिंह को दोबारा मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपने पर कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आने पर चुने हुए विधायक और पार्टी हाईकमान मुख्यमंत्री पद का फैसला करेगा। उ
न्होंने कहा कि अगर मात्र दावेदारी से कोई मुख्यमंत्री बन जाता तो उनका नाम सबसे पहला होता, चूंकि कांग्रेस में वह सबसे वरिष्ठ हैं।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और संगठन में चल रही तकरार पर कौल सिंह ने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने सुखविंद्र सिंह सुक्खू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया है।
समर्थकों ने कौल सिंह को मुख्यमंत्री बनाने के लगाए नारे
कोई दूसरा उनको पीसीसी अध्यक्ष पद से नहीं हटा सकता, हटाने का अधिकार भी पार्टी हाईकमान के पास ही है। सोशल मीडिया में सीडी प्रकरण पर उन्होंने कहा कि इस सीडी का मुझसे कोई नाता नहीं है। जब-जब चुनाव का समय आता है तो एक सशक्त नेता के चरित्र को खराब करने की कोशिश होती है।
कौल सिंह ने कहा कि विधायकों को लीज पर जमीन देना कोई गैर कानूनी नहीं है। मकान बनाने के लिए सोसायटी के नाम पर जमीन होगी। सीएम द्वारा टोपी को पटकने पर कौल ने कहा कि हरी और लाल टोपी पर भाजपा और कांग्रेस का ट्रेड मार्क नहीं लगा है।
मुख्यमंत्री को जो टोपी पहनाई थी, वह लाल नहीं बल्कि कुल्लवी टोपी थी। भोरंज के बलोखर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के स्तरोन्नत कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाए, जिससे वीरभद्र सिंह कैंप के लोग परेशान दिखे।
मेडिकल कॉलेजों में मिले हिमाचलियों को तवज्जो
हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन ने मांगों को लेकर वीरवार को स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के माध्यम से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को ज्ञापन भेजा है। इसमें एसोसिएशन ने उनकी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की है।
एसोसिएशन के महासचिव डा. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि प्रदेश में कई मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं, लेकिन इनमें विभिन्न पदों को भरने के लिए स्नातक हिमाचलियों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। यहां तक कि मेडिकल कॉलेजों में स्नातक की बजाय एमएससी आवेदकों को भी तवज्जो दी जा रही है।
ऐसे में संघ ने सरकार से मांग की है कि मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट हिमाचलियों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि बीएमओ के रिक्त पदों को जल्द भरा जाए। इसके अलावा संघ ने मांग की है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता एमबीबीएस हो और इन्हें जिला
चिकित्सा अधिकारी के अधीन रखा जाए। इसके अलावा कार्यक्रम अधिकारियों और ओएसडी की प्रदेश और जिलास्तर पर नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता एमबीबीएस सहित करने की मांग की है।
इसके साथ ही 4-9-14 का लाभ बिना किसी तिथि को आधार मान सभी चिकित्सकों को देने की मांग की है। एसोसिएशन ने जनवरी 2018 से चिकित्सकों की नियुक्ति नियमित आधार पर करने के निर्णय का भी स्वागत किया है।