इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगी सरकार
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प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिला भवन निर्माण की पुनर्विचार याचिका लेकर अब हिमाचल सरकार सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी। याचिका पर सुनवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में ही होगी। चार दिन पहले एनजीटी में मामले की सुनवाई के दौरान कहा गया है कि अगली सुनवाई चार सदस्यीय खंडपीठ करेगी।
हालांकि, विधानसभा में शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने इससे संबंधित प्रश्न के उत्तर में कहा था कि एनजीटी में फुल बेंच न होने के कारण यह मामला लटक गया है। एनजीटी में सुनवाई के लिए चार सदस्यीय खंडपीठ का होना आवश्यक था लेकिन दो सदस्य सेवानिवृत्त होने के कारण मामला लटक गया है। लिहाजा, सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।
एनजीटी ने दिए हैं ये आदेश
गौरतलब है कि एनजीटी ने शिमला के प्लानिंग एरिया में साढ़े चार मंजिला भवन बनाने के बजाय ढाई मंजिला भवन बनाने के आदेश दिए हैं। कहा गया है कि पहाड़ी इलाका होने के नाते जमीन ज्यादा बोझ उठाने के लायक नहीं है।
उधर, अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी विकास विभाग) तरुण कपूर ने कहा कि एनजीटी में यह मामला लगा था। इसमें सरकार को जो जजमेंट मिली है, उसमें चार सदस्यीय खंडपीठ की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि जिस दिन विधानसभा में यह सवाल लगा था उसी दिन दोपहर बाद प्रदेश सरकार को लिखित में यह जजमेंट मिली है। अब प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी।