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शहरी क्षेत्रों का मलबा नदी-नालों और जंगलों में फेंका तो लगेगा जुर्माना

Wed, 17 Jul 2019 01:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 17 Jul 2019 01:24 PM IST
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himachal govt will impose penalty for dumping garbage and debris in rivers
- फोटो : अमर उजाला

मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन वेस्ट पॉलिसी बनाने को मंजूरी दी है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण से निकलने वाले मलबे को अगर नदी-नालों और जंगलों में फेंका तो मालिकों पर जुर्माना लगाया जाएगा। भवन गिराने के बाद भी जो मलबा निकलेगा, उसको चिह्नित डंपिंग साइट पर गिराना होगा। 

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शहरी निकाय इसके लिए जमीन उपलब्ध कराएंगे। अपने हिसाब से वह मलबा फेंकने का शुल्क भी तय करेंगे। निजी ऑपरेटरों, एजेंसियों और शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम कार्य को अमलीजामा पहनाया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि बेतरतीब मलबा फेंकने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। साथ ही पेड़ छलनी हो रहे हैं। फैसला लिया गया है कि मलबे से भर जाने के बाद डंपिंग साइट को पार्किंग बनाया जाएगा।

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कैबिनेट में नहीं आएंगे गाड़ी खरीद के प्रस्ताव, सीएम देंगे मंजूरी

कैबिनेट की बैठक में गाड़ी खरीद के प्रस्ताव नहीं आएंगे। इन्हें मुख्यमंत्री के टेबल पर रखा जाएगा इन पर फैसला होगा। प्रदेश मंत्रिमंडल में बार-बार इस तरह के मामले जाने के बाद समय बचाने को यह निर्णय लिया गया। सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को भी कुछ मंत्रियों की ओर से इस तरह के कुछ मामले कैबिनेट मेें रखे।

मुख्यमंत्री ने इन पर यह निर्देश दिए। इस मामले पर गंभीर दिखे सीएम ने व्यापक जनहित के ज्यादा से ज्यादा मामले मंत्रिमंडल में लाने की बात की है। राज्य सचिवालय में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम मुद्दों के अलावा लोक निर्माण विभाग समेत कुछ विभागों ने गाड़ियों की खरीद के प्रस्ताव भी पेश कर दिए।

मंत्रिमंडल ने उन प्रस्तावों को मंजूरी तो दे दी लेकिन इस बात पर नाराजगी जताई कि इक्का-दुक्का वाहन खरीद की अनुमति के मामले भी मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए लाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल की इस आपत्ति के बाद निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री कार्यालय को ही सीधे ऐसे प्रस्ताव भेजे जाएंगे और मुख्यमंत्री उन पर फैसला लेंगे। इससे मंत्रिमंडल के समय की बचत भी होगी।

इक्का-दुक्का पदों की भर्ती के मामले भी सीएम को जाएंगे 
विभागों में इक्का-दुक्का पदों पर भर्ती के मामले भी सीएम के टेबल पर रखे जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि यह उन मामलों की स्थिति में तय किया गया है, जिनमें किसी रिक्ति पर भर्ती अत्यावश्यक है। ऐसा करने से भी मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक के समय की बचत होगी।

प्लानिंग एरिया में जमीन खरीदकर दुकानें बनाएगी सरकार

प्रदेश सरकार लोगों को निजी क्षेत्रों में भागीदार बनाकर लाभ का हिस्सेदार बनाएगी। हिमाचल के प्लानिंग एरिया में सरकार लोगों से जमीन खरीदेगी। उस जमीन पर टीसीपी महकमा दुकानें या व्यवसायिक परिसर का निर्माण करेगा। इसमें जो महीने या सालाना कमाई होगी, उसमें सरकार और लोगों की हिस्सेदारी होगी। मंगलवार को सरकार ने कैबिनेट की बैठक में लैड पुलिंग पालिसी लागू करने को मंजूरी दी है। 

इसको लेकर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग महकमा लोगों के साथ एमओयू साइन करेगा। सरकार का मानना है कि इससे सरकार और लोगों को फायदा होगा। टीसीपी यह जमीनें शहर के प्लानिंग एरिया में लेगी। भवनों का निर्माण कैसे किया जाना है, इसका खाका टीसीपी खुद तैयार करेगा। प्रदेश सरकार हिमाचल में चरणबद्ध तरीके से कालोनियों व व्यावसायिक परिसर का निर्माण करना चाहता है। हिमाचल सरकार का टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग भवनों के निर्माण कार्यों का काम किसी सरकारी एजेंसी से करवाएगा।

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