बनेगी नई ऊर्जा नीति, प्रदेश में फिर से तय होंगी बिजली दरें
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हिमाचल में साल 2018-19 के लिए बिजली दरें नई ऊर्जा नीति बनने के बाद ही तय होंगी। सरकार ने नई ऊर्जा नीति बनाने का फैसला लिया है। भारत सरकार की नीति तैयार होते ही हिमाचल सरकार भी अपनी नीति घोषित करेगी।
केंद्र सरकार के अलावा उत्तराखंड की ऊर्जा नीति को भी स्टडी किया जाएगा। प्रदेश में हर साल राज्य विद्युत नियामक आयोग बिजली की दरें तय करता है। अप्रैल के पहले हफ्ते में दरें घोषित होती हैं, लेकिन इस साल इसमें कुछ समय अधिक लगने की संभावना है।
प्रदेश में इस साल घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली की महंगी दरों का बोझ पड़ने की संभावना भी कम है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने साल 2018-19 में प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं को उपदान दरों पर बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए सहर्ष 475 करोड़ का बजट देने की घोषणा की है।
बीते साल सरकार ने बोर्ड को सरकार ने उपदान दरों पर बिजली देने के लिए 450 करोड़ का बजट दिया था। इसके चलते सरकार ने साल 2017-18 में बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं की थी।
2016 में इतने फीसदी बढ़ी थीं बिजली दरें
इस साल मिले 475 करोड़ के अनुदान से बोर्ड अपने घाटे को कम कर सकता है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2017-18 की दरें ही साल 2018-19 में भी लागू रहेंगी।
बीते साल हुए घाटे का हवाला देेते हुए बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग में पिटीशन दायर की है। इसमें हालांकि दरें बढ़ाने की मांग नहीं की है, लेकिन बिजली बोर्ड का खर्च बढ़ने और बीते साल भी दरें नहीं बढ़ने की दुहाई देते हुए आर्थिक स्थिति को खराब बताया गया है।
हिमाचल में साल 2016 में घरेलू बिजली की दरें 3.5 फीसदी बढ़ाई गई थीं। इससे पूर्व साल 2014-15 में बिजली की दरों में इजाफा किया गया था।
60 यूनिट तक एक रुपये है प्रति यूनिट दाम
वर्तमान में प्रदेश में 60 यूनिट तक सब्सिडी के बाद बिजली का दाम एक रुपये प्रति यूनिट है। 61 से 125 यूनिट तक 1.50 रुपये प्रति यूनिट, 126 से 300 यूनिट तक 2.90 रुपये प्रति यूनिट और 301 से ऊपर 4.35 रुपये प्रति यूनिट दाम तय किया गया है।