आनन-फानन में लिए गए कई फैसलों पर सरकार को लेना पड़ा यू टर्न
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एक महीने के भीतर सरकार के फैसलों के दांव कहीं सीधे पड़े तो कहीं उल्टे। शुरुआती तौर पर लिए गए कुछ फैसलों की तारीफ हुई। लेकिन कई फैसले विवाद का सबब बन गए।
यहां तक कि कुछ मामलों पर सरकार को यू टर्न भी लेना पड़ा। खासकर प्रदेश लोक सेवा आयोग में सदस्य की नियुक्ति, रिटायरियों और एक्सटेंशन वाले कर्मचारियों को पुनर्नियुक्ति देने के फैसले पर सरकार को स्टैंड बदलना पड़ा।
सरकार बनने के फौरन बाद जयराम सरकार ने एलान किया कि टायर्ड व रिटायर्ड लोगों की सेवाएं सरकार नहीं लेगी। पहली ही कैबिनेट बैठक में ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गईं।
लेकिन निर्णय के कुछ ही दिन बाद सरकार को रोल बैक करना पड़ा। धर्मशाला में हुई अगली कैबिनेट बैठक में सरकार ने गुपचुप तरीके से पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल व शांता कुमार के स्टाफ में रिटायर हो रहे कर्मचारियों को एक्सटेंशन दे दी।
इसके अलावा 13वें वित्त आयोग में ओएसडी रहे एक अधिकारी को भी पुनर्नियुक्ति देते हुए 14वें वित्त आयोग में ओएसडी बना दिया। जयराम सरकार यहीं नहीं रुकी।
सरकार ने इसके बाद पूर्व मुख्य सचिव के निजी सचिव व ट्रेजरी में तैनात एक कर्मचारी को भी एक्सटेंशन दे दी। रिटायरियों को पुनर्नियुक्ति और एक्सटेंशन देने के फैसले के बाद सरकार की खासी किरकिरी भी हुई।
पटवारियों पर भी पलट गई सरकार
रिटायरियों की बर्खास्तगी के फैसले पर सरकार की खासी फजीहत हुई। सरकार ने एक साथ हजार से ज्यादा पटवारियों को एक्सटेंशन देने के फैसले को निरस्त कर दिया। नतीजा यह हुआ कि वाहवाही के बजाय लोग कामकाज रुकने से त्राहि-त्राहि करने लगे। सरकार को आनन-फानन में अपने फैसले को पलटना पड़ा और नई नियुक्ति होने तक रिटायर्ड पटवारियाें को नियुक्ति देने का एलान करना पड़ा।
सोशल मीडिया पर मजाक बन गया फैसला
सरकार के फैसलों पर विवाद भी हुआ। सरकार ने गुपचुप तरीके से प्रदेश लोक सेवा आयोग में सदस्य के दो नए पद सृजित कर दिए। यही नहीं, एक पद के सृजन की नोटिफिकेशन के दिन ही नियुक्ति आदेश और शपथ ग्रहण भी करा दिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने जयराम सरकार का मजाक तो बनाया, साथ ही कोर्ट तक में इस आदेश को चुनौती देने की बात कही।
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डीजी सोमेश गोयल को हटाने पर उठे सवाल
गुड़िया प्रकरण के बाद हुई किरकिरी के बीच पुलिस की छवि सुधारने का प्रयास कर रहे डीजी सोमेश गोयल को हटाने पर भी सवाल उठे। पुलिस एक्ट के अनुसार डीजीपी को दो साल से पहले नहीं हटाया जा सकता।
लेकिन किन्हीं कारणों से सरकार ने सोमेश गोयल को हटा उनके जूनियर डीजी सीता राम मरडी को डीजीपी बना दिया। इस फैसले को लेकर भी अफसरशाही में खासी चर्चा हुई।
पहले तबादला, फिर संशोधन
जयराम सरकार ने पिछले एक महीने के भीतर सैकड़ों अफसरों के तबादले कर डाले, लेकिन अव्यवस्थित तरीके से किए गए तबादलों में से कई मामलों में सरकार को संशोधन आदेश जारी करने पड़े।