बिंदल मामले में 23 अन्य लोगों के खिलाफ केस वापसी को हरी झंडी
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नगर परिषद सोलन में भर्ती अनियमितता के मामले में विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल के बाद 23 अन्य आरोपियों के भी केस वापस लेने को विधि विभाग ने ‘हां’ कर दी है। विधि विभाग ने अपनी राय दी है कि लोक अभियोजक की बात को माना जा सकता है। इसके साथ ही पूर्व एचएएस अधिकारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ केस वापसी को कोर्ट में अरजी डालने का रास्ता साफ हो गया है।
विजिलेंस ब्यूरो के सरकारी वकील ने इस संबंध में राज्य सरकार को केस वापस लेने को एक चिट्ठी भेजी थी, जिसे विधि विभाग को भेजा गया था। इसी पर यह राय आई है। विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ केस वापसी का आवेदन पहले ही कोर्ट में दिया जा चुका है।
सोलन नप में भर्ती अनियमितताओं के आरोप में वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में दर्ज इस केस को जयराम सरकार राजनीतिक रंजिश से दर्ज हुआ मान रही है। डॉ. बिंदल उस समय नगर परिषद सोलन के अध्यक्ष थे। सूत्र बताते हैं कि विजिलेंस ब्यूरो के अभियोजन अधिकारी ने सरकार को लिखा है कि अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र के आरोप ही कोर्ट में तय हुए हैं।
इनके खिलाफ केस वापस लिया जा सकता है। इनकी इस मामले में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। न ही इनके खिलाफ कोई ठोस सुबूत ही हैं। इन आरोपियों में नगर परिषद सोलन में उस वक्त नियुक्त रहे तत्कालीन एचएएस अधिकारी एससी कलसोत्रा, नगर परिषद सोलन के तत्कालीन पार्षद देवेंद्र ठाकुर, हेमराज गोयल, अन्य पदाधिकारी और भर्ती होने वाले लोग शामिल हैं। कुछ आरोपियों का देहांत हो चुका है।
डा. राजीव बिंदल समेत अन्य के खिलाफ भर्ती में अनियमितताओं का मामला एक दशक पहले वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में दर्ज हुआ था। इसमें कुल 24 आरोपी बनाए गए। जयराम सरकार ने सत्ता में आते ही राजनीतिक आधार पर दर्ज मामलों को वापस लेने की बात की।
इस मामले को भी इसी श्रेणी में रखा गया। सरकार की मंजूरी के बाद डा. बिंदल के खिलाफ सरकारी वकील ने कोर्ट में केस वापसी की अरजी दे रखी है। कोर्ट में 24 नवंबर को इसकी सुनवाई होगी। गृह विभाग से अन्य आरोपियों की केस वापसी की सरकार की सहमति के बाद एक अन्य अरजी भी सरकारी वकील की ओर से कोर्ट में डाली जा सकती है।