करोड़ों के कर्ज तले दबे एचपीटीडीसी में उपाध्यक्ष बनाने की तैयारी
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प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) करोड़ों के वित्तीय बोझ तले दबा है और निगम में उपाध्यक्ष की ताजपोशी की तैयारी जोरशोर से की जा रही है। निगम की तीन दर्जन यूनिटें निजी क्षेत्र को देने की कवायद की जा रही है ताकि निगम के वित्तीय घाटे को कम किया जा सके।
निगम में तैनात विभिन्न वर्गों के अधिकारियों और कर्मचारियों को समय पर वित्तीय भुगतान तक नहीं किए जा रहे और ऐसे स्थिति निगम पर सरकार उपाध्यक्ष की ताजपोशी कर अनावश्यक रूप से वित्तीय बोझ डालने की तैयारी क्यों की जा रही है?
एचपीटीडीसी में तैनात करीब 1800 कर्मियों को दो करोड़ का अंतरिम राहत (आईआर) का भुगतान नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त निगम प्रबंधन ने अभी तक अपने कर्मचारियों को करीब पचास लाख का एडीए भी जारी नहीं कर पाया है।
निगम से सेवानिवृत्त हो चुके मुलाजिम 8 करोड़ की ग्रेच्यूटी की इंतजार में निगम प्रबंधन पर टकटकी लगाए हैं। जबकि ग्रेच्यूटी की राशि का भुगतान निगम के रिटायर कर्मचारियों को तत्काल करना होता है।
इसके अलावा निगम के दिल्ली स्थित हिमाचल भवन और हिमाचल सदन को सरकार ने पांच करोड़ का भुगतान करना है। बताते हैं कि हिमाचल भवन और सदन को सरकार ने करीब 12 करोड़ की राशि की भुगतान करना था और इसमें से आधी राशि जारी कर दी गई है और 5 करोड़ की राशि अभी भी खड़ी है।
इसके अतिरिक्त लीव इन-केशमेंट की 1.5 करोड़ की राशि का भुगतान भी कर्मचारियों को अभी तक नहीं हो पाया है। हैरानी की बात यह है कि राज्य सरकार यह अभी तक नहीं समझ पाई है कि एचपीटीडीसी कमजोर वित्तीय स्थिति के चलते कैसे उपाध्यक्ष की ताजपोशी के बाद इस खर्चे का बोझ सहन कर पाएगी?