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नाम के ही प्रधानाचार्य, नहीं हो रही नियमित नियुक्तियां: संघ
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 06 Mar 2017 04:56 PM IST
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राजकीय अध्यापक संघ की प्रदेश कार्यकारिणी ने सरकार से वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में कार्यरत प्रधानाचार्यों के शीघ्र नियमितीकरण की मांग की है। प्रदेशाध्यक्ष विरेंद्र चौहान, महासचिव नरेश महाजन, प्रदेश प्रवक्ता अश्वनी भट्ट, नरेश कुमार, तपिष थापा, विजय शमशेर भंडारी, सुरेश नरयाल, अश्वनी गुलेरिया, नरोत्तम वर्मा, राकेश संधू, संजीव कुमार और कविता विजलवान ने कहा कि राज्य में 1758 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में कार्यरत प्रधानाचार्यों के नियमित न होने से उन्हें प्रधानाचार्य के पद पर मिलने वाले वित्तिय लाभों से वंचित होना पड़ रहा है।
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प्रदेश में 2008 से ही शिक्षा विभाग में प्रधानाचार्य के पदों पर नियमित पदोन्नतियां न देकर विभाग केवल तदर्थ पदोन्नतियां या प्लेसमेंट दे रहा है। इससे पदोन्नत मुख्याध्यापकों और प्रवक्ताओं को कार्य तो प्रधानाचार्य का करना पड़ रहा है, लेकिन उन्हें प्रधानाचार्य पद के वेतन और भत्ते नहीं दिए जा रहे। ऐसे में प्रधानाचार्य पद पर पदोनति मजाक बनकर रह गई है। प्रदेश प्रवक्ता अश्वनी भट्ट ने कहा कि सरकार की इस कार्यप्रणाली से शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत प्रधानाचार्यों का मनोबल गिर रहा है।
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वर्तमान में प्रधानाचार्यों को 6600 ग्रेड पे मिल रहा है। इसी तर्ज पर उनके मूल वेतन और भत्तों में भी अंतर होता है। नियमित पदोन्नति न होने के कारण प्रधानाचार्यों को प्रति माह लगभग 5000 रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए संघ ने इस विषय पर सरकार को गौर करके आगामी बजट में प्रधानाचार्यों की पदोन्नति को नियमित करके उन्हें सभी देय वित्तिय लाभ नियुक्ति तिथि से देने की मांग उठाई है।
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