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अध्यक्ष पर गंभीर आरोपों के बाद दोफाड़ हुआ हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 04 Jun 2016 12:38 PM IST
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संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान के विरोध में उतरते हुए बीस पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
- फोटो : Demo pic
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महिला कर्मचारी से दुर्व्यवहार के आरोप को लेकर शिक्षकों और गैर शिक्षकों के बीच खड़े विवाद के बाद अब राजकीय अध्यापक संघ दोफाड़ हो गया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान के विरोध में उतरते हुए बीस पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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संघ की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी है। इस्तीफा देने वाले शिक्षकों ने अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान पर तानाशाह रवैये अपनाने का आरोप लगाया है। कहा कि इस रवैये के चलते ही वह संघ छोड़ने को मजबूर हैं। हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ से किनारा करने वालों में संघ के राज्य मुख्यालय सचिव चितरंजन काल्टा, जिला शिमला के महासचिव सतनाम खागटा शामिल हैं।
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इनके अलावा राज्य सचिव दिनेश बान्चटा, राज्य कार्यकारिणी में महिला सदस्य पूनम ओक्टा, पूनम चौहान, सहायक मुख्यालय सचिव राज्य प्रेम शर्मा, राज्य सचिव लोकेंद्र शर्मा, जिला सचिव भाग चंद, संयुक्त जिला सचिव शारदा चौहान, जिला सचिव राम लाल, शिमला खंड प्रधान जीतराम, कसुम्पटी खंड प्रधान मोहन शर्मा, ठियोग खंड प्रधान ऋषि सरकेक, देहा खंड प्रधान मदन हेटा, कोटखाई खंड प्रधान अरविंद काल्टा, कुमारसेन खंड प्रधान हरीश भारती, नेरवा खंड प्रधान भूपिंद्र झागटा, रोहड़ू खंड प्रधान अशोक रेटका, जिला कार्यकारिणी सदस्य मस्त राम और रीता चौहान शामिल है।
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इस्तीफा देने वाले इन पदाधिकारियों ने शिक्षा निदेशालय में कार्यरत महिला कर्मचारी से दुर्व्यवहार करने और नस्लीय टिप्पणी करने पर खेद व्यक्त किया है। इन शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से संघ की छवि खराब हुई है। शिक्षकों की मान मर्यादा को भी गहरी ठेस पहुंची है। कहा कि संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान के तानाशाह रवैये के कारण वह इस्तीफा दे रहे हैं। अध्यापक वर्ग की लगातार अनदेखी हो रही है। शिक्षकों की समस्याओं को उठाने के बजाए तबादला करवाने में अध्यक्ष व्यस्त हैं। चितरंजन काल्टा ने बताया है कि डाक के माध्यम से सक्षम कमेटी को इस्तीफे भेजे गए हैं।
गलत जानकारी दे रहे चितरंजन : वीरेंद्र
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान का कहना है कि चितरंजन काल्टा को संघ विरोधी गतिविधियां करने पर एक महीने पूर्व ही संघ से निकाल दिया गया है। चितरंजन काल्टा द्वारा इस्तीफा देने वालों के जो नाम दिए गए हैं, वह झूठे हैं। सभी लोग संघ के सक्रिय सदस्य हैं और उनके साथ खड़े हैं।