जातिवाद के पाठ पर प्रदेश सरकार ने मांगा जवाब, कमेटी गठित
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कॉलेजों में स्नातक के अंग्रेजी विषय के पाठ्यक्रम में जातिवाद का पाठ पढ़ाने के मामले में सरकार ने संज्ञान लिया है। सूबे के कॉलेजों में स्नातक के छठे सेमेस्टर के अंग्रेजी विषय के पाठ्यक्रम में जातिवाद के मामले में जयराम सरकार ने शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया है।
‘अमर उजाला’ में खबरें छपने के बाद हरकत में आए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) ने भी समीक्षा के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी पंद्रह दिनों के भीतर रिपोर्ट देगी। एचपीयू की रिपोर्ट मिलने के बाद शिक्षा विभाग भी पाठ्यक्रम में जातिवाद की समीक्षा कराएगा।
एचपीयू के कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने बताया कि अंग्रेजी विभाग की शिक्षिका और डीएस प्रो. गिरिजा शर्मा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। कमेटी में अंग्रेजी विभाग की शिक्षिका डॉ. रेखा शर्मा, डॉ. संजना शमशेरी, विधि विभाग के ललित ढढवाल और बोर्ड ऑफ स्टडीज में बाहरी सदस्य प्रो. अमृता
(सोनीपत) को सदस्य बनाया गया है। प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने बताया कि कमेटी पंद्रह दिनों में रिपोर्ट देगी। यह कमेटी ‘जूठन’ से समाज पर पड़ रहे सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों पर मंथन करेगी।
कई सालों से पढ़ाए जा रहे इस पाठ को अब रखा जाना चाहिए या हटाना चाहिए, इस पर भी कमेटी रिपोर्ट देगी। उधर, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमर देव ने बताया कि शिक्षा विभाग ने एचपीयू से ‘जूठन’ पढ़ाने के संबंध में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट के बाद समीक्षा कर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
स्नातक के छठे सेमेस्टर के अंग्रेजी विषय के पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत पढ़ाए जा रहे आंदोलनकारी एवं साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की उपन्यास की शैली में आत्मकथा ‘जूठन’ में कई शब्दों पर आपत्ति जताई गई है।
साल 2011 में प्रदेश में रूसा के तहत यूजी में अंग्रेजी के छठे सेमेस्टर में ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा ‘जूठन’ को शामिल किया गया। हिंदी भाषा में लिखी गई जूठन का अंग्रेजी में अरुण प्रभा मुखर्जी ने अनुवाद किया है। पुस्तक में ओमप्रकाश वाल्मीकि के जीवन के अनुभवों को बताया गया है, तो वहीं अनुवाद के बाद भी इस पुस्तक में कई प्रतिबंधित शब्दों का प्रयोग हुआ है।
‘जूठन’ को पाठ्यक्रम से हटाया तो आंदोलन
शिमला। दलित नेता रवि कुमार दलित ने कहा है कि वाल्मीकि समाज और रविदास समाज ने संयुक्त रूप से निर्णय लिया है कि अगर साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा ‘जूठन’ को पाठ्यक्रम से हटाया गया तो आंदोलन किया जाएगा। दलित ने कहा कि शिमला में वाल्मीकि समाज और रविदास समाज के लोगों की एक संयुक्त बैठक हुई, जिसमें यह फैसला लिया गया है। बैठक में राजकुमार, विजय कुमार, दया देवी, अनुजा, शांति, दिवेश कुमार, अजय, कविराज, दिलबाग, कुमारी अंजना श्रीधर आदि मौजूद रहे।