अस्पतालों में होमगार्डों की सेवाएं लेने से इनकार, सरकार ने इसलिए लिया फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश के अस्पतालों में होमगार्डों की सेवाएं लेने से सरकार ने मना कर दिया है। निजी एजेंसियों के सुरक्षा कर्मियों की अपेक्षा होमगार्ड महंगे पड़ रहे हैं। इसी के चलते सरकार ने प्रदेश के 21 अस्पतालों की सुरक्षा निजी कंपनियों को सौंपी है।
यह व्यवस्था पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल वर्ष 2015 में की गई है। अगर ये सुरक्षा कर्मी सही तरीके से सेवाएं नहीं दे रहे हैं तो इसकी जांच कर एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने यह जानकारी विधायक सुखराम के प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार होमगार्ड की दिहाड़ी नियमित कांस्टेबल के बराबर की गई है। ऐसे में एक होमगार्ड को 17 हजार मासिक देने पड़ते हैं।
निजी सुरक्षा कंपनी के कर्मचारी का खर्च 10,363 रुपये
निजी सुरक्षा कंपनी के कर्मचारी का खर्च 10,363 रुपये आता है। खर्च कम करने को सरकार ने अस्पतालों की सुरक्षा निजी हाथों में सौंपी है।
राकेश सिंघा ने एजेंसियों के सुरक्षा कर्मियों के शोषण का मामला उठाया।
कहा कि इन्हें न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है। कंपनियां ईपीएफ में अपना शेयर डालने के बजाय कर्मचारियों से काट रही हैं। सरकार को मामले की जांच करनी चाहिए? मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया।
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में लगभग 3 वर्षों से सुरक्षा का कार्य ठेके पर है। आईजीएमसी में 8, नाहन व मंडी में 1, चंबा में इसी साल से सुरक्षा का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपा है।
जिन अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या 100 से अधिक है, वहां की सुरक्षा का काम निजी कंपनियों को दिया है। विधायक बिक्रम जरयाल ने अनुपूरक प्रश्न में पूर्व सैनिकों को अस्पतालों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपने का आग्रह किया।
गृहरक्षकों की सेवाओं के पक्ष में थी पूर्व सरकार
विधायक पवन नैयर ने कहा कि कंपनियां सुरक्षा कर्मियों का शोषण कर रही हैं। 10 हजार के बजाय इन कर्मचारियों के खाते में मात्र 6200 रुपये आ रहे हैं। मंत्री ने इसमें जांच करने की बात कही।
कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में कंपनियों के सुरक्षा कर्मी रखने का मामला कैबिनेट में आया था, लेकिन सरकार ने सहमति नहीं जताई? उस समय सरकार अस्पतालों में गृहरक्षकों की सेवाएं लेने के पक्ष में थी। कहा कि मंत्री हर प्रश्न के जवाब राजनीति से प्रेरित होकर दे रहे हैं।
डस्टबिन पर ही खर्च कर डाले 9 करोड़ : सरवीण
शहरी विकास एवं आवास मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि पूर्व सरकार के समय डस्टबिन पर 9 करोड़ 10 लाख रुपये खर्चे गए। इसके लिए केवल धर्मशाला, सुंदरनगर और पांवटा को ही चुना गया। अन्य शहरी निकायों को भी चुना जाना चाहिए था।
भविष्य में सरकार इसका ध्यान रखेगी कि केंद्र सरकार से मिलने वाली धनराशि अन्य शहरों पर भी खर्च की जाएगी। यह राशि न केवल पूर्व सरकार के मिशन डस्टबिन की तरह व्यय होगी, बल्कि इसे सॉलिड वेस्ट और जागरूकता कार्यक्रम सहित अन्य कार्यों पर भी खर्चा जाएगा।
विधायक राकेश जम्वाल के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह जानकारी दी। कहा कि नगर परिषद सुंदरनगर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 40 चिन्हित स्थानों पर 80 आधुनिक भूमिगत कूड़ेदान लगाए जा रहे हैं।
इनकी कुल लागत 4.46 करोड़ है। विधायक राजेंद्र गर्ग ने घुमारवीं का ध्यान रखने का भी आग्रह किया। मंत्री ने कहा, भविष्य में सभी शहरों का ध्यान रखा जाएगा।