इन स्कूलों से शिक्षकों के नहीं होंगे तबादले, जयराम सरकार ने लिया फैसला
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शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों से अब तबादले नहीं होंगे। आरटीई के छात्र और शिक्षक अनुपात के मापदंड को पूरा करने वाले स्कूलों से ही अध्यापक ट्रांसफर हो सकेंगे। शिक्षकों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके मद्देनजर प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है। प्रदेश में पहली से आठवीं कक्षा तक के तमाम सरकारी स्कूलों में यह व्यवस्था लागू होगी।
किसी शिक्षक के तबादला आदेशों के साथ प्रारंभिक शिक्षा निदेशक और जिला उप निदेशक को यह प्रमाणपत्र भी देना होगा कि इस ट्रांसफर से आरटीई के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हो रहा है। ट्रांसफर एक्ट को लेकर बैकफुट पर आई जयराम सरकार ने अब शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर यह नई व्यवस्था बना दी है।
शिक्षा सचिव अरुण कुमार शर्मा ने सचिवालय में बताया कि नई व्यवस्था को लेकर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को आदेश जारी कर दिए गए हैं। आरटीई एक्ट को लेकर हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। पहली से 8वीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले जेबीटी, सीएंडवी, टीजीटी और हेडमास्टरों समेत सभी शिक्षकों के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।
30 छात्रों के लिए एक शिक्षक जरूरी
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम की धारा 19(2) में स्पष्ट है कि प्रारंभिक स्कूलों में 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना जरूरी है। 60 बच्चों के लिए दो शिक्षकों का होना अनिवार्य है, जबकि 90 बच्चों के लिए तीन शिक्षक होने चाहिएं। इसके अलावा स्कूलों में दस फीसदी से ज्यादा रिक्त पद भी नहीं होने चाहिए। हालांकि प्रदेश में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
मंत्री कर सकेंगे अपने विभाग के इन कर्मियों का तबादला
मुख्यमंत्री कार्यालय पर तबादलों को लेकर बढ़ रहे बोझ को कम करने के लिए जयराम सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार के सभी मंत्री अब अपने विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले कर सकेंगे।
मंत्रियों के पास यह अधिकार सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध के दौरान भी रहेगा। कार्मिक विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार के इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री के साथ-साथ आम लोगों को भी खासी राहत मिलेगी।
अभी तक सामान्य तबादलों को मंजूर करने का अधिकार सीएम के पास था। बैन रहने या खुलने की स्थिति में भी मंत्रियों को सिर्फ सिफारिश करने की शक्ति थी। तबादला मुख्यमंत्री कार्यालय से ही अनुमोदित होता था।
इसके बाद संबंधित विभाग तबादला आदेश जारी करता था। सरकार ने यह आदेश ऐसे समय में जारी किया है, जब तीन महीने में ही विपक्ष हजारों तबादले करने का आरोप सरकार पर लगा चुका है।