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1970 के बाद अब ये शहर बनेगा हिमाचल का दूसरा नगर निगम

Sun, 20 Sep 2015 09:12 AM IST
Updated Sun, 20 Sep 2015 09:12 AM IST
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himachal govt grants status of Municipal Corporation for Dharamsala.

धर्मशाला शहर हिमाचल प्रदेश का दूसरा नगर निगम बन गया है। नगर परिषद धर्मशाला को नगर निगम का दर्जा दिया गया है। यह फैसला हिमाचल मंत्रिमंडल ने लिया है। मंत्रियों ने भी फाइल पर रजामंदी की मुहर लगा दी है। अब जल्द ही प्रदेश सरकार इसकी अधिसूचना जारी करेगी। इस बारे में केंद्र सरकार को भी सूचना भेज दी गई है।

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वर्तमान में धर्मशाला में नगर परिषद है। नगर निगम धर्मशाला के दायरे में साथ लगती पंचायतों को शामिल किया जा रहा है। ये पंचायतें रामनगर, श्यामनगर, सिद्धबाड़ी और दाड़ी आदि हैं। धर्मशाला को नगर निगम बनाने का प्रस्ताव लंबे समय से विचाराधीन था।
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अपने निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले नगर निगम की शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शनिवार को सर्कुलेशन के माध्यम से भेजी गई फाइल पर सभी मंत्रियों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। सुधीर शर्मा ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और मंत्रिमंडल के तमाम सदस्यों का आभार जताया है।
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नगर निगम के लिए 50 हजार जनसंख्या जरूरी- नगर निगम के लिए 50 हजार की जनसंख्या जरूरी होती है। नगर परिषद की आय भी पांच करोड़ से ज्यादा होनी चाहिए। आसपास की पंचायतों को मिलाने के बाद धर्मशाला नगर निगम की इस शर्त को पूरा करता है। जितनी अधिक जनसंख्या होगी, उतनी ही केंद्र सरकार से अधिक आर्थिक मदद मिलेगी।

स्मार्ट सिटी का भी था पेच

himachal govt grants status of Municipal Corporation for Dharamsala.

धर्मशाला को नगर निगम बनाने के पीछे स्मार्ट सिटी का पेच भी बताया जा रहा है। नगर निगम बनाने के बाद धर्मशाला शहर को विस्तार मिलेगा। स्मार्ट सिटी बनने से नजदीकी पंचायतों को और भी फायदा होगा।

सुक्खू ने ऊना, सोलन के लिए मांगा दर्जा-
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ऊना और सोलन शहर को नगर निगम बनाने की मांग की है। उन्होंने शहरी विकास मंत्री को इन दो शहरों को नगर निगम बनाने का मामला मंत्रिमंडल के समक्ष रखने को कहा। धर्मशाला को नगर निगम बनाने के कैबिनेट के फैसले का कांग्र्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने स्वागत किया है।

नगर निगम शिमला को 1970 में मिला था दर्जा-
एक सितंबर 1970 को प्रदेश सरकार ने शिमला नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा दिया था। 1968 के एक्ट के बाद ‘दी हिमाचल प्रदेश म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट, 1979’ बना और इसकी सहमति/स्वीकृति राष्ट्रपति से 22 अगस्त 1980 को प्राप्त हुई। प्रदेश सरकार की ओर से 14 मई 1986 को नगर निगम शिमला के पहली बार 21 वार्डों के चुनाव करवाए गए। दो जून को नवनिर्वाचित नगर निगम का गठन हुआ।

वर्तमान में नगर निगम के 25 वार्ड हैं। साल 2012 में निगम में पहली बार महापौर और उपमहापौर के प्रत्यक्ष चुनाव हुए। हालांकि, प्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया को सरकार ने अब रद कर दिया है। वार्डों से चुने जाने वाले पार्षद ही अब महापौर का चयन करेंगे। इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।

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