कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक का बोर्ड भंग, अब डीसी होंगे एडमिनिस्ट्रेटर
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जयराम सरकार ने कांगड़ा सहकारी बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर (बीओडी) को भंग कर दिया है। बैंक के कामकाज में 20 से अधिक अनियमितताएं सामने आने के चलते सरकार ने यह फैसला लिया है। कांगड़ा जिला के उपायुक्त संदीप कुमार को बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है।
सरकार ने नाबार्ड और बैंक ऑडिट की रिपोर्टों को आधार बनाकर बोर्ड आफ डायरेक्टर को भंग किया है। सहकारिता मंत्री राजीव सैजल ने बताया है कि बैंक के संबंध में बहुत अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसायटी ने न्यायिक व्यवस्था को देखते हुए बीओडी को भंग करने का फैसला लिया है।
भाजपा के प्रदेश के सत्ता पर काबिज होने के साथ ही कांगड़ा सहकारी बैंक के चेयरमैन को बदलने की कवायद चली हुई है लेकिन बोर्ड आफ डायरेक्ट में कांग्रेस समर्थित निदेशक अधिक होने के चलते भाजपा अपने पसंदीदा सदस्य को चेयरमैन नहीं बना पा रही है।
बीते दिनों बैंक की कर्मचारी यूनियन भी चेयरमैन के खिलाफ खुल कर सामने आ चुकी है। मुख्यमंत्री को यूनियन द्वारा शिमला आकर मांगपत्र भी सौंपा गया। इसके बाद विधानसभा में भी यह मामला गूंजा।
जगदीश सिपाहिया कोर्ट जाने की तैयारी में
बैंक में पाई गई अनियमितताओं को लेकर सहकारी मंत्री राजीव सैजल विधानसभा में सीबीआई जांच करवाने तक की बात कह चुके हैं। अब बैंक के बीओडी को भंग कर सरकार ने सभी को चौंका दिया है। उधर, रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसासटी आरएन बत्ता ने बताया है कि कांगड़ा बैंक के कामकाज में बीस से अधिक अनियमितताएं पाई गई हैं।
कांगड़ा सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन जगदीश सिपाहिया ने कहा है कि बीओडी को भंग करने के लिए खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। कोर्ट से स्टे लेकर बैंक को दोबारा सफलता पूर्वक चलाया जाएगा। बैंक के प्रबंध निदेशक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार झूठी है। बिना आधार के सरकार काम कर रही है। मेरे बोर्ड पर एक भी लांछन नहीं लगाया जा सकता। हमने ईमानदारी से काम किया है। सरकार ने विधानसभा में झूठे आंकड़े पेश किए हैं।
साजिश के तहत बोर्ड को भंग किया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास चेयरमैन पद के लिए कोई भी चेहरा नहीं है। धूमल-शांता और जयराम ठाकुर अपने-अपने गुट से चेयरमैन बनाना चाहते हैं। चेयरमैन बनाने में सफलता नहीं मिलने पर बोर्ड को भंग करने से सरकार की हताशा साफ दिखी है।