सवा दो साल में तीसरी बार दवाइयों के टेंडर रद्द, अस्पतालों में मरीज परेशान
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प्रदेश स्वास्थ्य विभाग बीते सवा दो साल से स्वास्थ्य संस्थानों को दी जाने वाली दवाइयों का टेंडर नहीं करवा पाया है। अब तीसरी बार भी दवाइयों का टेंडर बिना कोई कारण बताए रद्द कर दिया गया है। इसके चलते प्रदेश भर के स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को 330 निशुल्क दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
खासकर जिला अस्पतालों, क्षेत्रीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और डिस्पेंसरियों में लोगों को परेशानी हो रही है। विभाग ने पहली बार 7 दिसंबर, 2016 को वर्ष 2016-2017 वित्तीय वर्ष के लिए ऑनलाइन टेंडर मांगे थे, लेकिन किसी कारणवश टेंडर को रद्द कर दिया गया।
इसके बाद 27 फरवरी, 2018 को दो वर्ष के लिए दवाइयों के टेंडर मांगे। कुछ दिन के बाद इसे भी रद्द कर दिया गया। विभाग ने तीसरी बार 7 मार्च, 2018 को ऑनलाइन टेंडर मांगे।
मरीजों को झेलनी पड़ रही परेशानी
सरकार ने 13 फरवरी को आयोजित बैठक में निर्णय लिया कि 15 नवंबर, 2016 की अधिसूचना के तहत विभाग प्रदेश में दवा बनाने वाली कंपनियों को प्राथमिकता देते हुए उनसे दवाइयों की खरीद की जाएगी। साथ ही सूबे की दवा कंपनियों से दवा खरीदते समय प्रदेश उद्योग विभाग से प्रमाण भी देना होगा।
इन सभी औपचारिकताओं पर विचार-विमर्श करने के बाद भी विभाग ने टेंडर रद्द कर दिए। उधर, प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. बलदेव ठाकुर ने बताया कि विभाग नए सिरे से दवाइयों के लिए शीघ्र टेंडर आमंत्रित करेगा। अस्पतालों में दवाइयों की कमी नहीं आने दी जाएगी।