मंत्री-नेता की लड़ाई में हिमुडा निदेशक की छुट्टी, दस दिन के भीतर रद्द की नियुक्ति
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जयराम सरकार में एक मंत्री और बड़े नेता की लड़ाई में हाल ही में नियुक्त हिमुडा के निदेशक की छुट्टी हो गई है। शिमला जिले के एक बड़े नेता को बाईपास कर की गई इस नियुक्ति को दस दिन के भीतर ही रद्द कर दिया गया।
इस नियुक्ति पर रसूखदार नेता की कड़ी आपत्ति के बाद मामला मुख्यमंत्री के दरबार तक जा पहुंचा। दिन भर गहमागहमी के बीच शनिवार देर शाम सरकार ने हिमुडा के नवनियुक्त निदेशक अनुपाल चौहान की नियुक्ति को निरस्त कर दिया। अनुपाल चौहान का कहना है कि क्षेत्र के एक बड़े नेता के दबाव में सरकार ने ऐसा किया है।
जिला शिमला की जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के नावर-टिक्कर क्षेत्र से संबंध रखने वाले सेब व्यापारी अनुपाल चौहान को 17 अक्तूबर को सरकार ने हिमुडा के निदेशक मंडल में बतौर गैर सरकारी सदस्य नियुक्ति दी थी।
सूत्रों ने बताया कि सरकार में हाल ही ओहदा पाए शिमला जिले से संबंधित एक युवा नेता के कहने पर मंत्री ने अनुपाल की नियुक्ति की सिफारिश की थी। ओहदेदार के बडे़ नेता के साथ मतभेद हैं।
मेरा परिवार संघ से जुड़ा हुआ, हटाने की सूचना नहीं : चौहान
बाईपास कर की गई इस नियुक्ति पर भाजपा के इस बडे़ नेता ने कड़ी आपत्ति जताई। आरोप लगाया है कि अनुपाल चौहान पार्टी में सक्रिय नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो कद्दावर नेता ने संघ के पदाधिकारियों तक भी यह बात पहुंचाई।
शनिवार को भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री ऑफिस पहुंचकर भी इसकी नाराजगी जताई। भाजपा नेता की इस नाराजगी पर निदेशक की नियुक्ति के पीछे का पूरा इतिहास खंगाला गया। मंत्री दफ्तर से फाइल तलब की गई, लेकिन फाइल न मिलने पर सीएम दफ्तर से एक नोट जारी करना पड़ा। इसके बाद शहरी विकास विभाग ने नियुक्ति की अधिसूचना को वापस ले लिया।
अनुपाल चौहान ने कहा - मेरा परिवार जनसंघ से जुड़ा हुआ है। मैं व्यापारी संघ का भी अध्यक्ष रहा हूं। हर सरकार का सम्मान करना मेरा कर्त्तव्य है।