नए बजट की तैयारियां शुरू, मगर पिछले बजट की कई घोषणाएं अधूरी
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जयराम सरकार ने अपना दूसरा बजट पेश करने की तैयारियां तेज कर दी हैं, मगर अभी पहले बजट की ही बहुत सी घोषणाएं अधूरी हैं। राज्य की अफसरशाही कई घोषणाओं को लागू करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। अफसरों की सुस्ती से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर खासे नाराज बताए जा रहे हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह माना जा रहा है कि इस बार एक महीने पहले फरवरी के शुरू में ही अगला बजट पेश किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपने पहले बजट भाषण में राज्य में 30 नई योजनाओं को लागू करने की घोषणा की। इनमें कई घोषणाएं लागू करने को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। कई लागू हो चुकी हैं, कई लागू की जा रही हैं। कई योजनाओं की तो फाइलें ही आगे नहीं सरक रही हैं। इन नई योजनाओं के अलावा सीएम ने कई अन्य नई छोटी-बड़ी घोषणाएं भी कीं जो जनहित की हैं, मगर दिलचस्प यह है कि इनमें से कई पर काम ही शुरू नहीं हो पाया है। खुद सीएम जयराम ठाकुर कई बार बजट घोषणाओं की समीक्षा बैठकें ले चुके हैं। मंत्रिमंडल बैठकों में भी इन पर चर्चा कर चुके हैं।
इन योजनाओं को लागू करना बाकी
- हिमाचल प्रदेश में गौ सेवा आयोग ने काम करना शुरू नहीं किया।
- हर ग्राम पंचायतों में सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए मोक्षधाम नहीं बने।
- एचआरटीसी बसों में स्वाइप मशीनों से टिकट कटने शुरू नहीं हुए।
- बसों के पासधारकों को इलेक्ट्रॉनिक कार्ड देने की स्कीम भी लागू नहीं हुई।
- क्रॉस ड्रेनेज की कमी दूर करने के लिए हिमाचल रोड इंप्रूवमेंट स्कीम लागू नहीं।
- हर पंचायत में ग्राम गौरव पट्ट नहीं लगे, इनमें क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के नाम लिखे जाने हैं।
- मुख्यमंत्री आदर्श विद्या केंद्र शुरू नहीं हो पाए।
- जनजातीय क्षेत्रों में एकलव्य मॉडल स्कूल खुले।
- वृद्धजनों की देखभाल को प्रदेश में वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र नहीं खुले।
- आईजीएमसी में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा भी अभी तक शुरू नहीं हुई।
- सभी 12 स्थानों पर प्रदूषण की मात्रा दर्शाने को डिस्पले स्क्रीनें नहीं लगीं।
- उद्योगों को लीज पर जमीन देने के नियम विवादों के बीच सरल नहीं हो पाए।
- दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य के 7.78 लाख नकुल स्वास्थ्य पत्र जारी नहीं हुए।
- मधुमक्खी विकास योजना के तहत 80 फ ीसदी उपदान देना शुरू नहीं किया।
- लावारिस पशुमुक्त पंचायतों को 10 लाख रुपये के पुरस्कार देने शुरू नहीं हुए।
- गोमूत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने को 50 प्रतिशत अनुदान देना शुरू नहीं।