बजट के बहाने लोकसभा चुनाव भुनाने की तैयारी में प्रदेश सरकार
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एक साल से अनुभवहीनता और अफसरों की कठपुतली होने का ताना सुनते आ रहे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर लोकसभा चुनाव में चारों सीटें दोबारा जीतने के दबाव के बीच शनिवार को अपना दूसरा बजट पेश करेंगे। पहले से ही 50 हजार करोड़ से ज्यादा के ऋण में डूबे प्रदेश पर और कर्ज बढ़ाए बिना जनहित वाला बजट पेश करना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती होगी। चूंकि केंद्र ने चुनावों के लिहाज से बजट में कई अहम घोषणाएं की, लेकिन इसमें हिमाचल को खास जगह नहीं मिली।
ऐसे में जयराम पर इस बात का भी दबाव रहेगा कि केंद्र की कमी को प्रदेश सरकार कैसे पूरा करे, जिससे प्रदेश की जनता का दिल जीतकर लोकसभा चुनाव को भुनाया जा सके। केंद्र ने जिस तरह से कर्मचारियों और किसानों पर फोकस करने के बाद हर वर्ग को कुछ न कुछ देने का प्रयास किया, वैसे ही जयराम ठाकुर को भी राज्य के हर वर्ग को कुछ न कुछ देकर यह महसूस कराना होगा कि वह जनता के साथ हैं।
वहीं पुरानी योजनाओं को आगे बढ़ाने और विस्तार के लिए उनको बजट देना भी जरूरी होगा। इनवेस्टर मीट को देखते हुए उद्योग जगत को लुभाने के लिए भी बजट में बड़े एलान की संभावनाएं जताई जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि उद्योगों को बढ़ावा देकर न सिर्फ उद्योग जगत में जयराम अपनी लोकप्रियता बढ़ाना चाहेंगे, बल्कि भाजपा के रोजगार के अवसर बढ़ाने के वादे को भी बल मिलेगा।
चुनावी वादों में ज्यादातर पर जयराम सरकार ने पहले साल में छुआ जरूर है, ऐसे में इस बार के बजट में उन कार्यों को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। चुनावी साल के लोकलुभावन बजट की आहट प्रदेश सरकार द्वारा सालाना प्लान को 63 सौ करोड़ से 71 सौ करोड़ करने से महसूस की जा सकती है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री जयराम किस तरह सभी चीजों में तालमेल बैठाकर केंद्र की तर्ज पर जनहित का बजट पेश करते हैं।