खेतों को केमिकल और युवाओं को नशा मुक्त बनाना लक्ष्य : आचार्य देवव्रत
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि देवभूमि हिमाचल के खेतों को केमिकल और युवाओं को नशे से मुक्त करना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि रासायनिक और जैविक कृषि का बेहतर विकल्प तो है ही, साथ ही यह प्रणाली सुरक्षित भी है और स्वस्थ जीवन जीने में सहायक एवं पर्यावरण मित्र है।
राज्यपाल ने यह बात धर्मशाला में आयोजित हिमाचल राष्ट्रीय कैडेट कोर कंपनी और कृषि विभाग के जागरूकता शिविर में कही। शिविर में खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खाद्य सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि कई अन्य मायनों में भी सुरक्षित है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में सरकार को प्रदेश में प्राकृतिक खेती के मॉडल का वास्तविक मायनों में कार्यान्वयन करने के लिए बधाई दी।
कहा कि सरकार ने इस परियोजना के तहत प्रदेश के किसानों के हित के लिए 25 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान भी किया है। उन्होंने युवाओं से दुर्व्यसनों से दूर रहने का आग्रह करते हुए नशामुक्त हिमाचल बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
नशे के इस पाप को देवभूमि में पनपने से रोकना संभव
उन्होंने कहा कि युवा शक्ति यदि ठान ले तो नशे के इस पाप को देवभूमि में पनपने से रोकना संभव है। उन्होंने कहा कि एनसीसी जैसे अनुशासनात्मक विंग से जुड़कर युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी और बढ़ जाती है और ईमानदारी से तय दिशा में एवं निर्धारित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने पर स्थितियों में सकारात्मक बदलाव लाना संभव है।
इस मौके पर एनसीसी ग्रुप कमांडर शिमला ब्रिगेडियर ललित जोशी, शून्य लागत प्राकृतिक खेती परियोजना निदेशक राकेश कंवर, उपायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार, एसपी संतोष पटियाल, एनसीसी कंपनी पांच के सीओ कर्नल डीकेएस चौहान, शून्य लागत
प्राकृतिक खेती परियोजना के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजेश्वर चंदेल, आत्मा परियोजना कांगड़ा की निदेशक डॉ. बिनता सूद, एनसीसी अधिकारी, एएनओज, कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर और बिलासपुर जिलों से एनसीसी की तीनों शाखाओं के कैडेट्स उपस्थित रहे।
शून्य लागत खेती के लिए हर पंचायत में तैनात होगा एक प्रशिक्षक
सूबे के किसानों और बागवानों को जीरो बजट खेती के लिए तैयार करने के लिए अब ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। शून्य लागत प्राकृतिक खेती परियोजना के लिए पहले हर पंचायत में एक ट्रेनर तैनात किया जाएगा, जो उस पंचायत के किसानों को शून्य लागत खेती के बारे में प्रशिक्षण देगा।
जिन ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, पहले वे अपने खेतों में शून्य लागत खेती शुरू करेंगे। उसके बाद उन्हें दूसरी पंचायतों के किसानों को शून्य लागत खेती के बारे में जागरूक करने के लिए भेजा जाएगा।
शून्य लागत प्राकृतिक खेती परियोजना का मुख्य लक्ष्य 2022 तक सूबे के हर किसान और बागवान तक पहुंचना है। इसके लिए जल्द ही प्रशिक्षण का दौर शुरू हो जाएगा। वर्तमान समय में प्रदेश में 9,61000 किसान हैं।
पहले चरण में 3000 को दिया जाएगा प्रशिक्षण
परियोजना के तहत सूबे में पहले चरण में 3000 किसान-बागवानों को शून्य लागत प्राकृतिक खेती के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए चार दिन की दो विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
पहली कार्यशाला 30 सितंबर से चार अक्तूबर तक कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और दूसरी कार्यशाला 12 से 16 अक्तूबर तक शिमला में आयोजित की जाएगी। शिमला में प्रस्तावित कार्यशाला में सेब उत्पादन करने वाले बागवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आंध्र प्रदेश की तर्ज पर होगी खेती : राकेश
शून्य लागत प्राकृतिक खेती परियोजना निदेशक राकेश कंवर ने कहा कि आंध्र प्रदेश में तीन लाख किसानों ने जीरो बजट खेती कर रहे हैं। उसी तर्ज तक हिमाचल में भी किसानों को शून्य लागत प्राकृतिक खेती के लिए तैयार किया जाएगा।