आउटसोर्स कर्मचारी: एक माह का वादा, चार महीने बाद थमाया झुनझुना
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आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकारी सेवाओं में लाने की प्रक्रिया को झटका लगा है। एक महीने में पालिसी लाने का एलान करने वाली सरकार ने करीब चार महीने बाद सरकारी सेवा में लाने के मुद्दे पर हाथ खड़े कर लिए हैं। शनिवार को कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक आउटसोर्स कर्मियों के लिए अब केवल अन्य लाभ देने के लिए नीति बनाना तय हुआ है।
महीनों से इंतजार कर रहे कर्मियों को सरकार ने झुनझुना थमा दिया है। कानूनी पेच का हवाला देकर सरकार अब उनका मासिक मानदेय बढ़ाएगी। संविदा कर्मचारियों की भांति उनके लिए सीएल और मेडिकल की छुट्टियों का प्रावधान भी करेगी।
कैबिनेट बैठक में पालिसी का ब्लू प्रिंट भी रखा गया, जिसमें मंत्रिमंडल ने कुछ संशोधन करने का सुझाव दे जारी करने का निर्देश दिया है। सबसे पहले सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों का वर्गीकरण करेगी। वर्गीकरण के लिए उनकी सेवा अवधि और पद को मानक बनाया जा सकता है। एक सप्ताह के अंदर पालिसी जारी कर दी जाएगी।
कोर्ट के फैसले बने बाधा
आउटसोर्सिंग पर प्रदेश में 35 हजार कर्मचारी तैनात है, लेकिन सरकार की बनाई जाने वाली नीति में साढ़े ग्यारह हजार ही लाभ के दायरे में आएंगे। शेष कर्मचारियों के लिए भी नीति में लाभ देने के प्रावधानों पर शासन स्तर पर मंथन होगा।
वहीं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को आकस्मिक नौकरी से निकालने का प्रावधान भी नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 10 मार्च को एक महीने में पालिसी बनाने का एलान किया था।
आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकारी सेवा में लाने की राह में सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक के कई फैसले बाधा हैं। उमा देवी बनाम कर्नाटक सरकार वाद में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने नियमितीकरण प्रक्रिया को खारिज किया था। उत्तराखंड, पंजाब और आंध्रप्रदेश में भी संबंधित नीतियों पर रोक लग चुकी है।
- विभाग द्वारा तय छुट्टियों का लाभ मिलेगा।
- एक साल में छह मेडिकल छुट्टियां मिलेंगी।
- मुख्यालय के बाहर ड्यूटी पर 130 रुपये (प्रदेश में) और 200 रुपये (प्रदेश से बाहर) दैनिक भत्ता मिलेगा।
- यात्रा भत्ता दिया जाएगा।
- चेक द्वारा होगा भुगतान। भत्ते, ईएसआई/ईपीएफ का लाभ मिलेगा।
- आउटसोर्स कर्मचारियों को अब आकस्मिक रूप से नहीं हटाया जा सकेगा।
- आउटसोर्स कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश भी मिलेगा।