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गुड़िया गैंगरेप हत्याकांड से हुए डैमेज के कंट्रोल में जुटी प्रदेश सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:22 PM IST
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गुड़िया प्रकरण पर सियासी रंग चढ़ने के बाद अब सरकारी तंत्र मामले के डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। जस्टिस फॉर गुड़िया आंदोलन के दौरान जनता की उठाई मांगों पर सरकार गंभीरता से मंथन कर रही है। प्रकरण के बाद जनता के क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल जैसी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठा।
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सीएम की फेसबुक पोस्ट पर विवाद के बाद पुलिस कस्टडी में एक आरोपी की मौत से चौतरफा घिरी सरकार अब हर कदम फूंक फूंक कर चल रही है। फेसबुक पर सफाई दे चुकी सरकार ने पुलिस अफसरों पर तबादले की गाज के बाद अब धार तरपुनू (ताली) स्कूल को गुड़िया नाम कर अपग्रेड कर दिया।
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हाईकोर्ट के दखल से सीबीआई जांच आदेश करवा मामले को केंद्र के पाले में डाल दिया। भाजपा के सियासी तेवरों को देखते हुए अब कांग्रेस सरकार हर फ्रंट पर मोर्चाबंदी में जुट गई है। सीएम आलाकमान से मिलकर आगामी रणनीति तैयार कर बड़े पलटवार की तैयारी में है।
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गुड़िया को न्याय दिलवाने के लिए उग्र जनता को शांत करने में सरकार कई मोर्चों पर विफल रही। जिला प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन प्रकरण में पंगु दिखा, तो निशाने पर सीधी सरकार आई। मामला प्रकाश में आने के बाद स्थानीय लोगों की क्षेत्र में स्कूल और पीएचसी की खोलने की मांग अनसुनी रही।
इसके बाद जनता लगातार आक्रोश होकर मामले को लेकर कई सवाल खड़े करती रही, लेकिन सरकार उलझती चली गई। जिले के उच्च अधिकारियों का पीड़ित परिवार से न मिलने के साथ सरकार की ओर से कोई मंत्री विधायक भी मिलने नहीं पहुंचा। पीड़ित परिवार को मुआवजा देने और दरिंदों की पहचान बताने वाले को एक लाख रुपये के ईनाम की घोषणा भी देरी से हुई।
इस बीच प्रकरण पर सियासी रंग चढ़ चुका था। भाजपा के साथ कांग्रेस संगठन की ओर से भी फ्रंट खुलने ने स्थितियां अनियंत्रित कर दी। सबसे अधिक फजीहत सीएम के अधिकारिक फेसबुक पेज पर डली कथित संदिग्धों की फोटो डालने के बाद झेलनी पड़ी।
सीबीआई मांग की जगह एसआईटी का गठन करना जनता को हजम नहीं हुआ। जब तक सीबीआई जांच के लिए सरकार ने मन बनाया तब कर थाने और गाड़ियां तोड़फोड़ दी गई। इस बीच सरकारी तंत्र स्थितियों को नियंत्रित करने से जूझता दिखा।
सबसे पहले सीबीआई जांच के लिए पहले प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री का निवेदन पत्र फिर हाईकोर्ट से दखल की याचिका इन्हीं कोशिशों का हिस्सा दिखा। चौतरफा हमलों से घिरा सरकार तंत्र पुलिस कस्टडी में एक आरोपी सूरज की मौत के बाद सदमे में आ गया। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने जनता का गुस्सा झेला।
आखिरी सरकार मानने को मजबूर हुई कि कई स्तर पर कोताही बरती गई है। एसआईटी के अधिकारियों पर तबादलों की गाज इसी का नतीजा था। इसके बाद सरकार की ओर से जनता के नाम पर मार्मिक अपील जारी की गई। अब गुड़िया के नाम पर स्कूल कर दिया। अब सरकार आने वाले दिनों में जनता के उठाये हर सवाल का जवाब देने की कोशिश कर सकती है।
सियासी फ्रंट को संभालने की चुनौती
जनता के दरबार के बीच जाने से पहले सरकार इस मामले में उठे हर सवाल पर विराम लगाने में जुट गई है। मामले से जुड़े हर तथ्यों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस को सख्त निर्देश हैं। कांग्रेस संगठन का इस प्रकरण पर मौन भी इन्हीं कोशिशों को नतीजा है।
मंत्रियों से मामले में संगठित रहकर सियासी फ्रंट पर विपक्ष को जवाब देने की रणनीति बनी है। इसके साथ सीएम वीरभद्र दो दिन दिल्ली दौरे पर जाकर कांग्रेस आलाकमान के समक्ष प्रदेश के ताजा हालात का ब्यौरा देंगे। लेकिन अब भी चुनाव से पहले इस मुद्दे की सियासत पर विराम लगाने की चुनौती बनी है।