हिमाचल सरकार ने 22 लाख पौधों के आयात पर लगाई रोक, ये है पूरा मामला
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राज्य के बागवानों के लिए विदेश से आयात किए जा रहे 22 लाख फल पौधों का ऑर्डर सरकार ने रद्द कर दिया है। बागवानी मिशन में लाखों पौधे आयात करने का मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया है। पूर्व सरकार के कार्यकाल में यह ऑर्डर दिया गया है।
सरकार दलील दे रही है कि जब पूर्व में मंगाए गए फल पौधों को बागवान अपने बगीचों में उगा नहीं सके हैं, तो फिर ऐसी स्थिति में फलदार पौधों के आयात का नया ऑर्डर देने की जरूरत क्यों पड़ी। ऐसे में पूर्व सरकार के समय में दिया गया पौधों का ऑर्डर संदेह के घेरों में आ गया है।
बागवानी एवं आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि जब पूर्व सरकार के समय खरीदे सेब के पौधों को बागवानों को नहीं दिया जा सका है तो ऐसी स्थिति में सेब के 22 लाख सेब के नए पौधे आयात करने का कोई औचित्य नहीं हैै।
पूर्व में 7.55 लाख सेब पौधे मंगाए, 2.96 लाख खराब
इस कारण से सरकार ने 22 लाख और नए पौधे आयात नहीं करने का फैसला लिया है। पूर्व में खरीदे गए पौधों में से बीस फीसदी सूखे पाए थे। राज्य के बागवानों की जरूरत को देखते हुए पूर्व कांग्रेस सरकार ने कुल 7 लाख 55 हजार सेब के पौधे मंगाए गए थे। इन पौधों में से करीब 2 लाख 96 हजार सेब के पौधे खराब हो गए थे।
कई सेब के पौधे बद्दी स्थित कोल्ड स्टोर में रखे हैं। करीब बीस फीसदी सेब पौधे सूखे हुए हैं। डॉ. वाईएस परमान बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय और बागवानी विभाग के पास भी इतनी ज्यादा जमीन नहीं है कि वह पुराने आयात किए फल पौधों को भूमि में उगा सकें। ऐसी स्थिति में लाखों नए पौधे कैसे आयात किए जा सकेंगे।