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हिमाचल में जल्द हो राज्य बागवानी बोर्ड का गठनः हरीश चौहान

Sat, 25 Aug 2018 06:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 25 Aug 2018 06:13 PM IST
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himachal Fruit and Vegetable producers Association demands

प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ ने सरकार से मांग की है कि राज्य बागवानी बोर्ड का गठन शीघ्र किया जाए। विश्व बैंक की वित्तीय मदद से हिमाचल में चलाए जा रहे 1134 करोड़ के बागवानी प्रोजेक्ट में हुई धांधली की रिटायर जज से जांच कराई जाए।

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कहा कि एपीएमसी शिमला-किन्नौर सेब उत्पादकों से गलत तरीके से कर 3 रुपये प्रति पेटी वसूल रही हैं। इससे बागवानों का आर्थिक शोषण हो रहा है। सरकार ने बजट में घोषणा की थी कि 4.25 पैसे का शुल्क खत्म किया जाएगा।
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संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने शनिवार को प्रेस क्लब शिमला में कहा कि बागवानों और किसानों के हितों की रक्षा को राज्य में किसान आयोग बनाना जरूरी है। विदेशी सेब के आयात से हिमाचली सेब के दाम गिरे हैं।
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इससे सेब उत्पादकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विदेशी सेब पर आयात शुल्क कम होने से राज्य में जून तक बीस लाख पेटी सेब का आयात हुआ है। 

सेब पर आयात शुल्क 25 फीसदी किया जाए

himachal Fruit and Vegetable producers Association demands

राज्य का रेड गोल्डन सेब 600 से 700 रुपये पेटी बिक रहा है। सेब पर आयात शुल्क 25 फीसदी किया जाए। इसे 44 देशों पर लागू किया जाए। चौहान के अनुसार विश्व बैंक की मदद से राज्य में बागवानों और किसानों के लिए कुल 4,166 करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर हुए हैं।

बागवानी के लिए 1134 करोड़ के प्रोजेक्ट में से दो साल में सिर्फ 30 करोड़ खर्च हुए हैं, जबकि सौ करोड़ परामर्श के लिए खर्च कर दिए दिए। डॉ. वाईएस परमार विवि के बागवानी विशेषज्ञों की परामर्श ली जा सकती थी।

हाइडेंस्टी के पौधे हिमाचल के बागवान लंबे समय से उगा रहे हैं और सफल भी रहे हैं। अन्य फलों के विस्तार के लिए 1688 करोड़, मशरूम विकास को 423 करोड़, हिमपुष्प को 150 और जल स्रोतों के लिए 708 करोड़ का प्रोजेक्ट हैं।

अभी तक बागवानों को प्रोजेक्ट का लाभ नहीं मिला है। प्रोजेक्ट 2022 तक चलना है। कहीं विश्व बैंक प्रोजेक्ट की प्रगति को देखते हुए अपने हाथ पीछे न खींच ले। प्रोजेक्ट में दस हेक्टेयर के क्लस्टर पाबंदी खत्म हो और विश्व बैंक के प्रोजेक्ट का सीधे लघु सेब बागवानों को लाभ मिले।

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