फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal: Family of Employee Who Resigned Cannot Claim Family Pension; High Court Dismisses Petition

हिमाचल: इस्तीफा देने वाले कर्मचारी का परिवार नहीं कर सकता फैमिली पेंशन का दावा, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Sun, 15 Mar 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sun, 15 Mar 2026 05:00 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने पेंशन मामले में स्पष्ट किया है कि यदि सरकारी कर्मचारी अपने पद से इस्तीफा देता है, तो उसकी पिछली पूरी सेवा जब्त हो जाती है। 

विज्ञापन
Himachal: Family of Employee Who Resigned Cannot Claim Family Pension; High Court Dismisses Petition
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पेंशन मामले में स्पष्ट किया है कि यदि सरकारी कर्मचारी अपने पद से इस्तीफा देता है, तो उसकी पिछली पूरी सेवा जब्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी या उसकी मृत्यु के बाद उसका परिवार फैमिली पेंशन और अन्य लाभों का दावा नहीं कर सकता है। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने यह फैसला मृतक रांझा राम की विधवा पत्नी की ओर से दायर एक याचिका को खारिज करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि इस्तीफा और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति में कानूनी रूप से बहुत अंतर है। इस्तीफे में कर्मचारी स्वेच्छा से अपने अधिकारों को छोड़ देता है, जबकि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति में सेवा लाभ बने रहते हैं।

विज्ञापन

कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी ने 2003 में इस्तीफा दिया था, जबकि याचिका 15 साल बाद वर्ष 2018 में दायर की गई। कोर्ट ने इसे देरी का मामला माना और कहा कि इतने वर्षों बाद ऐसे दावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि याचिकाकर्ता के पति ने हिमाचल प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग में 1983 से 2003 तक बतौर हेल्पर सेवाएं दीं। लेकिन 13 अगस्त 2003 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे विभाग ने स्वीकार कर दिया। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी ने विभाग से फैमिली पेंशन और अन्य बकाया लाभों की मांग की। विभाग की ओर से इन्कार किए जाने के बाद इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई, जिसमें विधवा ने फैमिली पेंशन की मांग की थी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि कर्मचारी की नियमित सेवा केवल 6 वर्ष, 7 महीने और 13 दिन थी, जबकि पेंशन के लिए कम से कम 10 वर्ष की नियमित सेवा अनिवार्य है।

विज्ञापन
विज्ञापन

चेक बाउंस मामले में हस्ताक्षर की जांच विशेषज्ञ से करवाने की मांग खारिज
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में आरोपी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर की जांच हैंडराइटिंग विशेषज्ञ से कराने की मांग की थी। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही करार देते हुए कहा कि हर मामले में विशेषज्ञ की राय लेना अनिवार्य नहीं है। अदालत स्वयं भी हस्ताक्षरों का मिलान करने में सक्षम है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता को खुद के खिलाफ सबूत देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी ने धारा 313 के बयान में कुछ और कहा था, जबकि आवेदन में वह अपने बचाव से पलट गया। जिस चेक (2013) के आधार पर तुलना की मांग की जा रही थी, वह वर्तमान विवादित चेक (2014) से बहुत पुराना था और उनकी राशि में भी बड़ा अंतर था। आरोपी ने निचली अदालत में भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 45 और 73 के तहत एक आवेदन दायर किया था, जिसमें उसने मांग की थी कि शिकायतकर्ता के उन हस्ताक्षरों की जांच कराई जाए, जो कुछ पुराने दस्तावेजों पर मौजूद हैं। जिन्हें शिकायतकर्ता ने पहचानने से इन्कार कर दिया था। आरोपी ने दावा किया कि उसने केवल सुरक्षा चेक दिए थे, जिनका दुरुपयोग किया गया है। निचली अदालत ने आरोपी के इस आवेदन को खारिज कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed