हिमाचल एंट्री टैक्स: सीएम सुक्खू बोले- सीमांत क्षेत्रों में रोज आवाजाही करने वाले लोगों के बनेंगे पास
विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि एंट्री टैक्स मेरे समय से नहीं, बीते 30 वर्षों से हिमाचल प्रदेश में आने के लिए लिया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि एंट्री टैक्स से राहत देने के लिए हिमाचल प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों में रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों के पास बनाए जाएंगे। कैबिनेट की बैठक में इस बाबत फैसला लिया जाएगा। बुधवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि एंट्री टैक्स मेरे समय से नहीं, बीते 30 वर्षों से हिमाचल प्रदेश में आने के लिए लिया जा रहा है। इतना शुल्क बढ़ा भी नहीं है जितना हल्ला हो रहा है। उन्होंने पंजाब के वित्त मंत्री और हिमाचल भाजपा के नेताओं पर बिना तथ्यों के बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि फास्टैग से एंट्री टैक्स को जोड़ने के चलते शुल्क में कुछ बढ़ोतरी हुई है।
प्रदेश के जिन क्षेत्रों में एनएच टोल बैरियर और प्रदेश के एंट्री बैरियर साथ हैं, वहां एक ही बार शुल्क लेने का विचार किया जाएगा। बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान एंट्री टैक्स को लेकर खूब हंगामा हुआ। भाजपा विधायक राकेश जम्वाल, सुखराम चौधरी, कांग्रेस विधायक राकेश कालिया और हरदीप बावा ने यह मामला उठाया। कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने कहा कि गगरेट विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा पंजाब से लगता है, वहां लोग हर रोज काम के सिलसिले में पंजाब आते-जाते हैं, रिश्तेदारियां भी हैं, क्या सरकार रोज का काम करने आने वालों को पास देगी। पांवटा से भाजपा विधायक सुखराम चौधरी ने उत्तराखंड-हरियाणा से रोज औद्योगिक क्षेत्र पांवटा आने वालों को रियायत देने की बात कही।
नालागढ़ से कांग्रेस विधायक हरदीप बाबा ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में कम से कम पांच किलोमीटर के दायरे के लोगों को पास दिया जाए। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि पंजाब सरकार के वित्त मंत्री ने भी विधानसभा में एंट्री टैक्स लगाने और बैरियर लगाने की बात कही है, इससे सीमा पर लोगों को तीप बैरियर पर टैक्स देना पड़ेगा। भाजपा विधायक राकेश जम्वाल ने कहा कि सरकार ने एंट्री टैक्स में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है। इससे प्रदेश का पर्यटन प्रभावित होगा। मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायकों के आरोपों पर तल्ख होकर पलटवार करते हुए कहा कि हिमाचल की निजी गाड़ियों से शुल्क नहीं लिया जाता है। शुल्क में बढ़ोतरी से सरकार को अनुमानित 228 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा। चालू वित्त वर्ष की तुलना में यह 54 करोड़ रुपये अधिक है।