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Himachal News: उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री बोले- एचआरटीसी कर्मचारियों के पहचान पत्र किए जा रहे अपग्रेड

Tue, 13 Jan 2026 06:46 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 13 Jan 2026 06:46 PM IST
सार

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने सचिवालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि एचआरटीसी कर्मचारियों के लिए पहले से जो व्यवस्था चल रही है, वही रहेगी। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Deputy CM Mukesh Agrihotri said HRTC employees identity cards are being upgraded
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने कहा कि एचआरटीसी कर्मचारियों के लिए पहले से जो व्यवस्था चल रही है, वही रहेगी। कर्मचारियों के लिए हिम बस कार्ड उनकी यात्रा से संबंधित नहीं है। कर्मचारियों के पहले भी पहचान पत्र कार्ड बनाए जाते हैं, लेकिन उन कार्ड को नई तकनीक के साथ अपग्रेड किया जा रहा है। पुलिस कर्मचारियों के बनाए जा रहे हिम बस कार्ड को लेकर उन्होंने कहा कि निगम प्रबंधन से बात कर अलग से जांच की जाएगी। उन्होंने यह बात सचिवालय में प्रेस वार्ता में कही।

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उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 5 लाख यात्री एचआरटीसी की बसों में सफर करते हैं। एचआरटीसी को 28 प्रकार की रियायतें देनी पड़ती हैं। कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां निजी ऑपरेटर बस नहीं चलाता, एचआरटीसी की बसें वहां जाती हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि एक इलेक्ट्रिक बस ट्रायल के तौर पर हिमाचल आई है। इस बस का परीक्षण 36 जगहों पर किया गया है।

अर्की, सोलन और सराहन जैसे क्षेत्रों में ट्रायल कर यह देखा जा रहा है कि बस की क्षमता, चार्जिंग और संचालन पहाड़ी इलाकों में कितना व्यावहारिक है। सिरमौर के हरिपुरधार में हुए बस हादसे पर कहा कि जांच के आदेश दिए है। हादसे में 14 लोगों की मौत हुई। ओवरलोडिंग मुख्य कारण प्रतीत हो रहा है। इसके अलावा सड़क पर पाला होने से बस के स्किड होने की संभावना भी है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 148 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे, जिनमें से 147 को ठीक किया जा चुका है। वहां क्रैश बैरियर लगाए गए हैं। रोड सेफ्टी को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं और यूनियनों को भी सुझाव देने के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे।

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एचआरटीसी के बेड़े से हटेंगी 500 बसें
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि एचआरटीसी के पास करीब 3200 बसें हैं, जिनमें से लगभग 500 बसें हटानी पड़ेंगी। औसतन 15 साल या 9 लाख किलोमीटर चल चुकीं बसों को हटाना जरूरी होता है। जब तक इलेक्ट्रिक बसें और 250 मिनी बसें नहीं आ जातीं, तब तक पुरानी बसों को पूरी तरह हटाया नहीं जा सकता। इसके लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। केंद्र सरकार की नीति के तहत बाहरी राज्यों की बसों को 3 लाख रुपये जमा कर रूट लेने की छूट दी गई, जिसका हिमाचल ने विरोध किया था। अब स्थिति यह है कि बाहरी बसें दिल्ली से बुकिंग करने के बजाय रास्ते में ही सवारियां उठा रही हैं, जिससे हिमाचल की बसों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सवारी उठाने का अधिकार हिमाचल की बसों का है, बाहरी बसों का नहीं। इस मामले को लेकर राज्य सरकार अदालत में लड़ाई लड़ रही है।
 
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500 बढ़ गई शिमला रोपवे की लागत
शिमला रोपवे परियोजना पर मुकेश ने कहा कि सिंगल टेंडर को अनुमति देना या न देना कैबिनेट का निर्णय है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने में करीब 5 साल लग गए, जिससे लागत बढ़कर 500 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। डॉलर की कीमत बढ़ने का असर भी परियोजना पर पड़ा है। यह एक ग्लोबल टेंडर है और कंपनी के साथ बातचीत चल रही है। फिलहाल टेंडर फाइनल नहीं हुआ है। पहले इस टेंडर की कॉस्ट 1556 करोड़ थी।

 

विक्रमादित्य सिंह ने किस संदर्भ में बात कही, यह पता होना जरूरी
लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह की पोस्ट पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह देखना है कि उन्होंने किस संदर्भ में यह बात कही है। कई बार बयान सुनने या पढ़ने के बाद ही उसका सही अर्थ स्पष्ट होता है।
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