हिमाचल विधानसभा: 2,700 करोड़ का शिमला रोपवे ठंडे बस्ते में, सरकार ने निजी निवेशकों के भरोसे छोड़ा सपना
मानसून सत्र में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं की स्थिति, इनकी लागत, निजी निवेश और पर्यटन स्थलों को रोपवे से जोड़ने को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल किए।
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विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वीकार किया कि शिमला रोपवे परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2700 करोड़ रुपये पहुंचने के कारण सरकार इसे आगे नहीं बढ़ा सकी और परियोजना रद्द करनी पड़ी। प्रश्नकाल के दौरान रोपवे परियोजनाओं पर हुई लंबी चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए कि राज्य सरकार अब अपने संसाधनों के दम पर बड़े रोपवे प्रोजेक्ट खड़े करने की स्थिति में नहीं है। यही वजह है कि सरकार ने निजी निवेशकों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं और अब पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को ही आगे का रास्ता माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में रोपवे भविष्य की जरूरत है, लेकिन उनकी निर्माण लागत और संचालन व्यय बेहद अधिक है। कई बार ट्रॉलियां खाली चलती हैं और तब भी खर्च सरकार को उठाना पड़ता है। ऐसे में निजी क्षेत्र की भागीदारी के बिना बड़े प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने माना कि वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) की मंजूरियां कई योजनाओं की राह में बड़ी बाधा बनी हुई हैं। उधर, रोपवे परियोजनाओं को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के विधायक मुखर दिखे। चुराह के विधायक हंसराज ने चंबा की तीन प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं का मुद्दा उठाया तो भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने हिमानी चामुंडा रोपवे और बिलिंग क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर सरकार को घेरा।
शाहपुर से विधायक केवल सिंह पठानिया ने नड्डी जिपलाइन और धर्मशाला रोपवे की प्रगति पर जवाब मांगा। चिंतपूर्णी से विधायक राकेश कालिया ने चिंतपूर्णी रोपवे को अधिक सुविधाजनक बनाने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि सरकार के पास करीब 1200 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, लेकिन रोपवे जैसी पूंजी-प्रधान परियोजनाओं के लिए निजी निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने निवेशकों को हिमाचल आने का खुला निमंत्रण देते हुए कहा कि सरकार हर संभव सहयोग देगी। जरूरत पड़ने पर पर्यटन परियोजनाओं से जुड़े निवेशकों को भूमि उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा सकता है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अनुपस्थिति में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल पीपीपी मोड के तहत छह प्रमुख रोपवे परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं।
सबसे महत्वाकांक्षी पलचान-रोहतांग रोपवे परियोजना पर काम जारी है। 340 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके विपरीत बिजली महादेव रोपवे स्थानीय विरोध और एनजीटी में लंबित मामले के कारण लगभग ठहर गया है। 278 करोड़ रुपये की इस परियोजना को दिसंबर 2025 में फोर्स मेजर घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा बाबा बालक नाथ मंदिर रोपवे, कुल्लू ढालपुर-पीज रोपवे और धर्मशाला-नड्डी जिपलाइन जैसी परियोजनाएं मंजूरियों और प्रक्रियाओं के अलग-अलग चरणों में हैं।