हिमाचल में राम राज, नए सीएम की बहन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और भाई..
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जयराम ठाकुर का परिवार सादगी की मिसाल है। छोटी बहन अनु ठाकुर आंगनबाड़ी वर्कर हैं तो बड़े भाई अनंत राम काष्ठकुणी शैली के निपुण कारीगर। जब भाई पहली दफा विधायक चुने गए थे तो बहन को आंगनबाड़ी वर्कर बने कुछ ही दिन हुए थे।
भाई विधायक से पंचायतीराज मंत्री और आज प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए हैं, लेकिन आज भी बहन आंगनबाड़ी वर्कर ही हैं। बड़े भाई अनंतराम पिता स्व. जेठूराम से विरासत में मिली काष्ठकला की कारीगरी की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
गरीबी का दौर देखकर छात्र राजनीति से संघ तक सफर आसान नहीं था। गरीबी के दौर में इस परिवार की बदौलत ही सफर तय किया।
राजनीति में कदम रखने पर जब वर्ष 1993 में हार मिली तो परिवार चट्टान की तरह साथ रहा। हालांकि, माता-पिता ने एक बार राजनीति में जाने से टोका भी, लेकिन जयराम के बुलंद हौसलों के आगे गरीबी ने भी घुटने टेक दिए।
पिता कहते थे- राजनीति गरीबों का काम नहीं बेटा
जयराम की बहन अनु ठाकुर ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि पिता स्व. जेठूलाल कहते थे यह राजनीति गरीबों का काम नहीं है बेटा, लेकिन हार से भाई जयराम ने दिल छोटा नहीं किया।
1998 में जीत के बाद से जयराम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कहते-कहते बहन की आंखें भर आती हैं। कहा सोचा न था एक दिन भाई इस तरह से हमारे हिमाचल का मान-सम्मान बनेगा। आप सबको बधाई एक गरीब परिवार का बेटा भाई आज सीएम बना है।
खेतीबाड़ी से जुड़ा परिवार, सरकारी नौकरी तक नहीं
जयराम ठाकुर के भाई-बहन आज भी सादगी से जीवन यापन कर रहे हैं। जयराम अब मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए हैं, लेकिन इनकी दिनचर्या में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। एक भी भाई-बहन सरकारी नौकरी में नहीं है।
सबसे बड़ी बहन पुरणू देवी घर संभालती हैं। उनकी उम्र 60 पार हो गई है। बड़े भाई अनंत राम काष्ठकला शैली के कारीगर हैं तो छोटे भाई वीर सिंह ठेकेदार हैं।
सबसे छोटी बहन 20 वर्षों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रही हैं। एक भतीजा पुलिस में भर्ती हुआ है।