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हिमाचल: प्रशासनिक ट्रिब्यूनल खोलने के लिए केंद्र ने मांगे कर्मचारियों की सेवा शर्तें और प्रक्रिया नियम

Thu, 26 Oct 2023 08:32 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 26 Oct 2023 08:32 PM IST
सार

प्रदेश सरकार ने बीते दिनों केंद्र सरकार को पत्र भेजकर प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को फिर खोलने की मंजूरी मांगी थी। राज्य मंत्रिमंडल के निर्देशों पर कार्मिक विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र भेजा था। 

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Himachal: Center asked for service conditions and procedure rules of employees to open administrative tribunal
प्रशासनिक ट्रिब्यूनल(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व जयराम सरकार के समय बंद हुए प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को दोबारा खोलने की मंजूरी से पहले केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कर्मचारियों की सेवा शर्तों और प्रक्रिया नियमों का प्रस्ताव देने को कहा है। प्रदेश सरकार ने बीते दिनों केंद्र सरकार को पत्र भेजकर प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को फिर खोलने की मंजूरी मांगी थी। राज्य मंत्रिमंडल के निर्देशों पर कार्मिक विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र भेजा था। भारत सरकार ने प्रस्ताव पर कुछ आपत्तियां लगाकर और जानकारियां देने को कहा है। कार्मिक विभाग ने आपत्तियों को दूर करने का काम शुरू कर दिया है। जल्द ही भारत सरकार को दोबारा से प्रस्ताव भेजा जाएगा। कार्मिक विभाग ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल एक्ट 1985 के प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है।

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प्रस्ताव में तर्क दिया है कि ट्रिब्यूनल खुलने से सरकारी कर्मचारियों को सेवा संबंधी मामलों में जल्द न्याय मिलेगा। सेवा से संबंधित मामलों को ट्रिब्यूनल में लड़ने के लिए सरकार को भी कम खर्च उठाना पड़ेगा। बता दें कि सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों को देखने के लिए हिमाचल में वर्ष 1986 में सबसे पहले प्रशासनिक ट्रिब्यूनल खोला था। भाजपा की धूमल सरकार ने वर्ष 2008 में इसे बंद कर दिया था। वर्ष 2014 में वीरभद्र सरकार ने ट्रिब्यूनल को फिर से बहाल किया था। वर्ष 2019 में जयराम सरकार ने अध्यादेश लाकर ट्रिब्यूनल को फिर बंद कर दिया था। इस दौरान करीब 21 हजार केस ट्रिब्यूनल से हाईकोर्ट के लिए शिफ्ट हुए थे। ट्रिब्यूनल के स्टाफ को भी हाईकोर्ट में शामिल कर दिया था।
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प्रशासनिक ट्रिब्यूनल खोलने के प्रस्ताव से कर्मचारी वर्ग चिंता में
शिमला। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ (विनोद गुट) के अध्यक्ष विनोद कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद सिंह ब्रागटा और अतिरिक्त महासचिव विनोद शर्मा ने कहा है कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के दोबारा खोलने के राज्य सरकार के प्रस्ताव ने कर्मचारी वर्ग को चिंता में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि आखिर उच्च न्यायालय से बेहतर कोई दूसरी व्यवस्था कैसे कारगर और न्यायप्रिय साबित हो सकती है। इस पर मुख्यमंत्री सुक्खू को ऐसा कोई भी फैसला लेने से पहले इसके सभी पहलुओं पर गंभीरता और संवेदनशीलता से विचार करना होगा। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के अनुभव यह बताते हैं कि कर्मचारी-मजदूर वर्ग को न्याय देने के नाम पर बनाई गई यह व्यवस्था सेवानिवृत्त नौकरशाहों को समायोजित करने के लिए है।

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