HP CABINET DECISIONS: कर्मचारियों को सरकार का बड़ा तोहफा, यहां जानिए 20 बड़े निर्णय
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जयराम सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। राज्य के विभिन्न सरकारी दफ्तरों में बीते 31 मार्च तक तीन वर्ष की अनुबंध सेवाएं पूरी करने वाले हजारों कर्मचारियों को नियमित करने के लिए जयराम मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।
हालांकि, एक महीने से लटकी नियमितीकरण की प्रक्रिया की वजह से इन्हें बैकडेट से लाभ नहीं मिलेगा। कार्मिक विभाग की अधिसूचना के बाद महकमे नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
विभागों को 31 सितंबर 2017 से लेकर 31 मार्च 2018 के बीच तीन वर्ष पूरा करने वाले कर्मचारियों को सूचीबद्ध करना है। दस्तावेजों के परीक्षण और अन्य औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें नियमित किया जाएगा।
मंत्रिमंडल ने 31 सितंबर 2018 को तीन वर्ष पूरा करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का फैसला भी लिया है। इन्हें एक अक्तूबर 2018 से नियमित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वीरभद्र सरकार ने अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण की शर्तों में बदलाव किया था।
पांच वर्ष की अवधि को घटाकर तीन वर्ष करने के साथ साल में नियमितीकरण की दो तिथियां 1 अप्रैल और 1 अक्तूबर तय की थीं। भाजपा के सत्ता में आने के बाद पहली बार अनुबंध कर्मचारियों को लाभ दिया जाना था, लेकिन सरकार तय समय पर निर्णय नहीं ले सकी।
इनकी सेवाओंं को भी नियमित करने की मंजूरी
प्रदेश सरकार ने पांच साल का निरंतर सेवाकाल पूरा करने वाले दैनिक भोगी और आकस्मिक भोगी कर्मियों को नियमित करने का भी निर्णय लिया है। विभिन्न विभागों में 31 मार्च 2018 तथा 30 सितंबर 2018 में पांच साल का निरंतर सेवाकाल पूर्ण कर चुके लाभ मिलेगा।
हजारों दैनिक भोगियों को इससे लाभ मिलेगा। पूर्व सरकार ने अनुबंध कर्मचारियों की तरह दैनिक भोगी कर्मियों को सात साल से पांच वर्ष में नियमित करने का निर्णय लिया था।
इतना ही नहीं पूर्व सरकार ने साल में दो बार नियमितीकरण की प्रक्रिया के लिए तिथियां भी तय की थी। इसी के तहत कैबिनेट ने मंगलवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
मौजूदा जल विद्युत नीति में कुछ संशोधनों को मंजूरी
हिमाचल में 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ाने और निवेशकों को रिझाने के लिए जयराम मंत्रिमंडल ने मंगलवार को नई ऊर्जा नीति को मंजूरी दे दी। पहले से ही मंजूर 2200 मेगावाट के 300 पावर प्रोजेक्टों को शुरू कराने के लिए सरकार ने इनसे 12 साल तक रॉयल्टी न लेने का फैसला लिया है।
नए प्रोजेक्टों के लिए भी रॉयल्टी स्लैब में बड़ा बदलाव किया गया है। मंत्रिमंडल ने 18 और 30 फीसदी रॉयल्टी स्लैब को खत्म कर अब 12 फीसदी वाले स्लैब को प्रभावी रखने की मंजूरी दी है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ऊर्जा नीति में व्यापक संशोधन करने को मंजूरी दी गई।
हर साल होगा 7 हजार करोड़ का निवेश
ऊर्जा नीति बदलने से हर साल प्रदेश में 7 हजार करोड़ का निवेश होगा। सरकार का मानना है कि इस निवेश से प्रदेश में रोजगार के नए विकल्प पैदा होंगे। दस साल में 10 हजार मैगावाट का लक्ष्य लेकर सरकार ने नीति में संशोधन किया है।
इसके तहत 5100 मेगावाट क्षमता के 737 बाधित प्रोजेक्ट शुरू करने और 2200 मेगावाट क्षमता की 300 परियोजनाओं को आवंटित करने की राह आसान होने की आस है। पुरानी नीति के तहत बार-बार विज्ञापन देने के बावजूद निवेश आगे नहीं आ रहे थे।
पुरानी नीति के तहत निवेशकों से पहले 12 साल में 12 फीसदी जबकि अगले 18 वर्ष के लिए 18 और उससे अगले 10 वर्षों के लिए 30 प्रतिशत रॉयल्टी वसूली जाती थी। ज्यादा रॉयल्टी की वजह से निवेशकों ने प्रोजेक्ट नहीं लगाए।
लार्सन एंड टूर्बो, रिलांयस, टाटा जैसी कंपनियों ने प्रोजेक्टों से हाथ पीछे खींच लिए थे। नई नीति में अब पहले से मंजूर प्रोजेक्टों में निवेशकों को 12 साल रॉयल्टी नहीं देनी होगी।
हालांकि, अगले 28 वर्ष तक उन पर 18 और 30 फीसदी रॉयल्टी प्रभावी रहेगी। इसके अलावा 12 फीसदी की छूट की भरपाई के लिए अलग से साढ़े चार फीसदी रॉयल्टी देनी होगी।
कृतिक खेती खु्शहाल किसान' योजना के दिशानिर्देशों को मंजूरी
प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान’ योजना के कार्यान्वयन के दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी है। प्राकृतिक कृषि के माध्यम से किसानों की खेतों से आय बढ़ाने तथा कृषि लागत कम करने को इसे लागू किया जाएगा।
पहले चरण में 40 हजार किसान इस योजना के दायरे में लाए जाएंगे। 120 क्लस्टरों मेें 15000 रुपये मासिक मानदेय पर समूह कार्यकर्ता तैनात होंगे। वहीं, अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि गाइडलाइंस मंजूर होने के बाद यह योजना इसी माह लागू की जा सकती है।
मंत्रिमंडल ने इस योजना के लिए 25 करोड़ रुपये के प्रावधान को स्वीकृति दी है। कैबिनेट ने दावा किया कि इससे प्राकृतिक कृषि को नई दिशा मिलेगी तथा किसानों की ओर से खेतों में रासायनिक खादों के उपयोग में कमी आएगी।
प्रदेश के विश्वविद्यालय इस योजना के कार्यान्वयन के लिए पैकेज ऑफ प्रैक्टिसिज तैयार करेंगे। शुरुआत में केवल उन क्षेत्रों और उन किसानों को ही इस योजना के तहत कवर किया जाएगा, जो जैविक खेती के तहत पंजीकृत हैं। लगभग 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है।
यहां स्थापित होगा सफेद सीमेंट संयंत्र
जयराम सरकार ने जिला सिरमौर के नौहराधार में सफेद सीमेंट संयंत्र स्थापित करने के लिए भारत सरकार के उपक्रम एफसीआई अरावली जिप्सम एंड मिनरल्स इंडिया लिमिटेड को सैद्घांतिक मंजूरी दे दी है।
सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी को 108 हेक्टेयर क्षेत्र पर माइनिंग लीज प्रदान करने के लिए उसे लेटर ऑफ इंटेंट भी जारी करने को मंजूरी दी है। हाल ही में कंपनी के अधिकारियों ने सिरमौर स्थित जमीन का निरीक्षण किया था।
प्रत्यक्ष तौर पर ही करीब 1500 लोग रोजगार से जुड़ेेंगे। करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला यह प्रोजेक्ट सिरमौर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का पहला व्हाइट सीमेंट कारखाना होगा।
मंत्रिमंडल ने हमीरपुर जिले में ब्यास नदी पर 66 मेगावाट क्षमता के धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना को एसजेवीएन लिमिटेड को आवंटित करने की मंजूरी दे दी।
विज्ञान में रुचि बढ़ाने को अब पुरस्कृत होंगे विद्यार्थी
राज्य सरकार ने विज्ञान विषय के प्रति हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए युवा विज्ञान पुरस्कार योजना शुरू करने का फैसला लिया है। मंगलवार को मंत्रिमंडल ने इस योजना को अपनी मंजूरी दे दी।
इसके तहत प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के 10 वीं और 12वीं के पांच पांच टॉपर बच्चों को पुरस्कृत किया जाएगा। मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार टॉपर बच्चे को जहां एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा।
वहीं, दूसरे स्थान पर रहने वाले को सत्तर हजार, तीसरे स्थान पर रहने वाले को पचास हजार, चौथे स्थान पर रहने वाले को तीस और पांचवें स्थान पर रहने वाले को बीस हजार रुपये बतौर नकद ईनाम मिलेंगे।
इसमें दसवीं के बच्चों को मिलने वाली नकद राशि फिक्स डिपॉजिट के रूप में दी जाएगी, जो दो साल बाद मैच्योर होगी। बारहवीं के बच्चों को चेक के माध्यम से यह राशि दी जाएगी, जिसे वह तत्काल ही उपयोग में ला सकेंगे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस पुरस्कार की घोषणा अपने पहले बजट में भी की थी। चूंकि, दसवीं और बारहवीं के बोर्ड का रिजल्ट आ चुका है, ऐसे में सरकार इसी साल से इस पुरस्कार योजना को शुरू करेगी।
कैबिनेट ने जिला कंगड़ा में जवाली में शैक्षिक संस्थान के प्रबंधन के लिए विभिन्न श्रेणियों के 18 पदों के साथ-साथ नए सरकारी कॉलेज खोलने की मंजूरी दे दी।
उप-तहसील को तहसील अपग्रेड किया
कैबिनेट ने कंगड़ा जिले की उप-तहसील थुरल को तहसील में अपग्रेड करने की मंजूरी दी। साथ ही कार्यालय के प्रबंधन के लिए आवश्यक कर्मचारियों की व्यवस्था करने की निर्णय लिया।
दुराचार, एसिड अटैक पीड़ितों को अब मिलेगा मुआवजा
प्रदेश में महिला अपराध को लेकर सख्त रुख अपनाने पर जोर दे रही जयराम सरकार ने महिलाओं के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब दुराचार और एसिड के हमले की पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर तीन लाख रुपये दिए जाएंगे।
मंत्रिमंडल ने विक्टिम कंपनसेशन फंड स्कीम 2018 को मंजूरी दे दी है। पहले यह मुआवजा गृह, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और जिला प्रशासन में से एक विभाग देता था, लेकिन मुआवजा मिलने में पीड़ित को काफी समय लग जाता था।
अब केंद्र की आर्थिक मदद से प्रदेश सरकार पीड़ितों को आर्थिक मदद मुहैया करवाएगी। प्रदेश में अभी तक दुराचार और एसिड हमले की पीड़ितों के लिए ठोस मुआवजा नीति नहीं थी।
अलग-अलग विभागों की ओर से अलग-अलग मुआवजा राशि होने की वजह से पीड़ितों को समान मुआवजा नहीं मिल पाता था। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद प्रदेश सरकार ने समान मुआवजे की नीति तैयार कर केंद्र को भेजी।
इसके तहत दुराचार व एसिड अटैक पीड़ितों को तीन लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया। केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद अब मंगलवार को जयराम सरकार के मंत्रिमंडल ने भी इसे मंजूरी प्रदान कर दी। इस मुआवजे के तय होने के बाद अब पीड़ितों को परेशानी के समय आर्थिक मदद मिलने में परेशानी नहीं होगी।
इस स्कूल को दिया शैल बाला का नाम
जयराम सरकार ने कसौली में सरकारी ड्यूटी के दौरान गोली लगने से मारी गई टीसीपी अधिकारी शैल बाला को श्रद्धांजलि देेते हुए जिला मंडी के बलद्वाड़ा वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल का नाम शैल बाला वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल करने का फैसला लिया।
ज्वाली में खुलेगा नया कॉलेज, 18 पद सृजित
मंत्रिमंडल ने जिला कांगड़ा के ज्वाली में नया कॉलेज खोलने को भी मंजूरी दे दी है। यहां कॉलेज खोलने का फैसला लेने के साथ ही सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के 18 पद भी सृजित किए हैं।
दस मेगावाट वाले प्रोजेक्टों से बिजली खरीदेगा बोर्ड
नई ऊर्जा नीति के तहत 10 मेगावाट तक की क्षमता वाली जल विद्युत परियोजनाओं की ऊर्जा हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड द्वारा अनिवार्य रूप से खरीदने को मंजूरी दी गई है।
25 मेगावाट तक की जलविद्युत परियोजनाओं के मामलों में लागू होने वाली जेनरिक टेरिफ समझौते के कार्यान्वयन की तिथि के स्थान पर परियोजना के शुरू होने की तिथि से लागू करने को भी मंजूरी दी गई है।
25 मेगावाट तक की क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाओं में ओपन एक्सेस दरों को लागू नहीं किया जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि ये राज्य से बाहर ऊर्जा को प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर बेच सकें।
जेएंडके, उत्तराखंड से अब होगा मुकाबला
राष्ट्रीय जलविद्युत नीति के प्रावधानों तथा हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती राज्यों उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के प्रावधानों के दृष्टिगत नई परियोजनाओं के आवंटन के लिए लागू होने वाली रॉयल्टी दरों को तर्कसंगत बनाते हुए मंत्रिमंडल ने ऊर्जा नीति में संशोधन करने का फैसला लिया।
जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड में हिमाचल के मुकाबले जल विद्युत परियोजनाओं पर रायल्टी बहुत कम है। इस कारण हिमाचल में निवेशक आने से गुरेज करते हैं।
बता दें कि उत्तराखंड में 15 वर्षों तक शून्य और 16वें वर्ष के बाद 18 प्रतिशत और जम्मू कश्मीर में पहले 15 वर्षों के लिए शून्य और इसके बाद 16वें वर्ष से 12 प्रतिशत हैं।