हिमाचल विधानसभा बजट सत्र: आरडीजी पर सीएम और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने, जानें किसने क्या कहा
विधानसभा बजट सत्र के पहले दिन आरडीजी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने आ गए।
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केंद्र की ओर से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने पर हिमाचल विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने एक-दूसरे को घेरा। आरजीडी पर नियम 102 के लाए प्रस्ताव पर चर्चा में जयराम ने कहा कि सीएम कह रहे हैं कि हिमाचल 2027 तक आत्मनिर्भर होगा और 2032 तक अमीर राज्य बन जाएगा। आर्थिक संकट में उनके पास इसके लिए कौन-सा फार्मूला है। अब उस ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल करना चाहिए। इस पर पलटवार करते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि भाजपा के समय में 70 हजार करोड़ रुपये केंद्र से मिले और वर्तमान सरकार को 17 हजार करोड़ रुपये मिले हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश को वह आत्मनिर्भर होकर ही जो चला रहे हैं। कहा- हम तो 17 हजार करोड़ रुपये से आत्मनिर्भर हिमाचल की कहानी लिख रहे हैं। इससे पहले जयराम ने कहा कि वित्त सचिव की रिपोर्ट ने सारी तस्वीर सामने ला दी है। पिछले भुगतान लंबित हैं। वित्त सचिव कह रहे हैं कि संस्थानों का युक्तिकरण करेंगे। कर्मचारियों का एरियर नहीं दे पाएंगे। सारे विकास कार्य, उपदान आदि सबकुछ बंद करने के बाद भी घाटे का 6000 करोड़ रुपये का गैप रहेगा। अभी तो आरडीजी मिल रहा है। यह फैसले लेने की बात भी कर रहे हैं। जब कुछ है ही नहीं तो फैसला कैसे करेंगे। उन्होंने कहा-आप चाहते हैं कि केंद्र के समक्ष मामला रखें। इसे रखा जाएगा, मगर इसके लिए अपने विवेक का इस्तेमाल किया जाएगा। जयराम ने कहा कि प्रदेश बहुत संकट में है। इसकी गंभीरता को समझें। केंद्र के समक्ष मामले रखें। लोग सबसे ज्यादा गालियां नेताओं को दे रहे है कि आप अपने के लिए क्या कर रहे हैं। जो बोर्डों-निगमों के अध्यक्षों और सरकार में मित्रों को रखा है, उन पर विचार करें। 90 से ज्यादा तो एडवोकेट जनरल रखे गए हैं। हर चीज में मोदी और जयराम के खिलाफ बोलना सही नहीं। प्रदेश आर्थिक संकट से बाहर निकले, सभी यह चाहते हैं। कड़े फैसले लिए जाएं।
हमने एडवोकेट जनरल रखे तो वाइल्ड फ्लॉवर हॉल और जेएसडब्ल्यू जैसे केस जीते : सुक्खू
सीएम ने बजट सत्र के पहले दिन चर्चा के दौरान जयराम ठाकुर के आरोपों पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार प्रधानमंत्री के समक्ष आरडीजी की बहाली के लिए जयराम के नेतृत्व में भी जाने को तैयार है। सुक्खू ने कहा कि जयराम ठाकुर वेतन, एरियर आदि बंद होने की जो बात कर रहे हैं। इस पर वह बाद में बात करेंगे। उन्होंने कहा कि वित्त सचिव ने अपने तरीके से आरडीजी बंद होने के बाद वित्तीय हालात पर है। निपटना वित्त मंत्री का काम है। हम तो निपट ही रहे हैं। जयराम के समय में शिशु धर्मा और एक अन्य को मुख्य सचिव का स्केल मिलता था। ये ओएसडी थे। ये इस वित्त आयोग की बात नहीं कर रहे हैं। वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद किए हैं। इनके समय में 10 रुपये की चीज 20 रुपये में खरीदी गई। ये एडवोकेट जनरल रखने की बात कर रहे हैं। इनके समय में भी 72 लगे थे। ये इनको याद नहीं है। खिसियानी बिल्ली खंभा नोचने वाली स्थिति है। जिनको वर्तमान सरकार ने लगाया, सबको काम पर लगाया गया है। वाइल्ड फ्लॉवर हॉल और जेएसडब्ल्यू जैसे केस जीता। उससे हिमाचल को इसका हक दिलाया है।
चिट्ठी को लेकर भी सुक्खू और जयराम बहस
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि आरडीजी को लेकर बुलाई गई बैठक को लेकर मुख्यमंत्री चिट्ठी लेकर घूम रहे थे। सीएम के पास क्या फोन नहीं था। बैक डेट से चिट्ठी निकालकर 7 तारीख को उनके कार्यालय में डिलीवर की गई। इस पर पलटकर मुख्यमंत्री बोले कि जयराम ठाकुर ने मीडिया में बात की कि वित्त सचिव ने चिट्ठी भेजी है। क्या संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने उनसे बात नहीं की। जयराम ने खुद चिट्ठी पर मीडिया में बात की तो स्पष्टीकरण देना पड़ा। बीच में मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि उन्होंने जयराम ठाकुर से बात की है। इस पर मुख्यमंत्री बोले कि चिट्ठी दिखाने की नौबत इसलिए आई, क्योंकि जयराम का वीडियो चला। जयराम ठाकुर ने पूछा कि चिट्ठी कब छपी और कब दी गई। जब मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बात की तो उस समय पर टूर पर था। मुख्यमंत्री ने असत्य बोला। इस पर सीएम ने कहा कि झूठ तो आप बोल रहे हैं सरेआम।
बाल सफेद होने पर भी दोनों में नोकझोंक
जयराम ठाकुर ने सीएम की ओर इशारा कर कहा - समझ लेना चाहिए कि अब आप एनएसयूआई में नहीं हैं। हम अब बुजुर्ग हो गए हैं। बाल सफेद हो गए हैं। सीएम सुनते नहीं हैं। सुनते हैं तो मानते भी नहीं है। चीजें जोर से बोलने से ठीक नहीं होतीं। आराम से यार प्यार से भी बोलना होता है। बार-बार केंद्र सरकार के खिलाफ बोलते हैं। पीएमजीएसवाई में राज्य का शेयर बढ़ा है। लोक निर्माण मंत्री केंद्र से बजट मिलने पर धन्यवाद तो सकते हैं। इस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा - आपने कहा कि सिर के बाल सफेद हो गए। इसमें मेरा क्या कसूर था। आपके बाल इसलिए उड़ गए कि आपको राज्य की चिंता नहीं रही। मेरे बाल इसीलिए सफेद है कि मुझे की चिंता है।
नहीं करेंगे बिजली बोर्ड का निजीकरण, न ही ओपीएस बंद करेंगे : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार बिजली बोर्ड का निजीकरण नहीं करेगी और न ही ओपीएस को बंद किया जाएगा। सीएम सुक्खू ने कहा कि वित्त सचिव ने जो प्रस्तुति दी है, वह आरडीजी बंद होने की स्थिति पर दी है। इसके बावजूद सरकार उचित वित्तीय प्रबंधन कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के समय जिस सहारा योजना में भ्रष्टाचार हुआ, उसे भी चलाया जाएगा। उन्होंने जयराम ठाकुर से प्रश्न किया कि अच्छा वित्त मंत्री कौन होगा, जो 70 हजार करोड़ में सरकार चलाए या फिर केवल 17 हजार करोड़ रुपये में ही चलाए।
यह राजनीति करने का समय नहीं, जनता की लड़ाई : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि आरडीजी बंद होने का यह मामला किसी पार्टी का नहीं है। यह हिमाचल की जनता का अधिकार है। सरकार जनता की लड़ाई लड़ रही है। इस मामले में सबको एकजुट होने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने यह बात उस समय कही जब भाजपा विधायक चर्चा के दौरान सरकार पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे।
आत्मनिर्भर का सपना दिखाकर हिमाचल को बना दिया भिखारी : रणधीर
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने आरडीजी पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि जनता को आत्मनिर्भर का सपना दिखाकर हिमाचल को भिखारी बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार नहीं चल रही है तो छोड़ दें। हम चलाने को तैयार हैं। माइनिंग पॉलिसी बनाओ, जितना पैसा आरडीजी से एक साल आना था। यहां से आएगा। पर्यटन, जड़ी-बूटियों से रेवेन्यू आएगा। सरकार को फिजूल का खर्चा बंद करना पड़ेगा। इसकी शुरुआत अपने से करनी पड़ेगी।
ऑपरेशन लोटस का बदला क्या आरडीजी बंद करके लिया: बुटेल
विधायक आशीष बुटेल ने कहा कि आरडीजी हिमाचल का अधिकार है। केंद्र ने पहली बार बंद की है। उसके बंद होने से हिमाचल, हिमाचलियत व प्रदेश के लोगों के भविष्य पर तलवार लटक गई है, जिसे शायद विपक्ष के लोग नहीं समझ पा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि विपक्ष ऑपरेशन लोट्स से सरकार को नहीं गिरा पाए, क्या आरडीजी बंद करके उसका बदला लिया है।
आरडीजी बंद करना राजनीतिक मुद्दा नहीं, जनता का अधिकार : राठौर
ठियोग के कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि आरडीजी को बंद करने का यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह जनता का अधिकार है। इसे लेकर सबको एकजुट होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल को 2023 और 2025 की मानसून जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान से उभरना है। हिमाचल की तुलना अन्य राज्य से नहीं की जा सकती है। हिमाचल को ग्रांट मिलती आ रही है। यह जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की अलग-अलग स्कीमों के तहत हिमाचल को फंड देना कोई अहसान नहीं, बल्कि संघीय ढांचे में हिमाचल का हक है।
गारंटियों से केंद्र के समक्ष राज्य की अलग तस्वीर बनी : जयराम
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सीएम कह रहे हैं कि सात गारंटियां पूरी कर दीं। इससे भी केंद्र सरकार के समक्ष प्रदेश सरकार की यह तस्वीर गई कि यहां मुफ्त की रेवड़ियां दी जा रही हैं और यहां 1500 रुपये महिलाओं को दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पंद्रहवें वित्तायोग के समय राजस्व घाटा अनुदान को घटते क्रम में राज्य को इसलिए दिया गया कि आगे के लिए आदत सुधार लें। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने भी राजस्व घाटा अनुदान बंद करने की बात की है। 15वें वित्त आयोग ने पहले ही कहा था कि राजस्व घाटा अनुदान लंबे समय तक देने की स्थिति नहीं है। सोमवार को सदन में जयराम ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार में 19,600 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। उनकी अपनी सरकार का कार्यकाल पूरा होने से पहले उनकी कर्ज लेने की क्षमता 6000 करोड़ रुपये थी, पर उन्होंने नहीं लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल के लिए 90:10 की हिस्सेदारी बहाल की, जो पिछली सरकार ने बंद कर दी थी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जबसे देश में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है, तबसे हिमाचल प्रदेश को जितना सहयोग मिला है वह हिमाचल के इतिहास में कभी नहीं मिला। यूपीए के दो कार्यकाल में हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में मात्र 18 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जबकि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में ही 78 हजार करोड़ रुपए मिले। सबसे बड़ी बात यह है कि हिमाचल सर्वाधिक आरडीजी पाने वाले राज्यों में शामिल रहा। पीएम बनते ही नरेंद्र मोदी ने हिमाचल को विशेष राज्य का दर्जा दिया। केंद्र प्रायोजित स्कीम में हिमाचल के अंशदान को घटाकर 10 प्रतिशत किया, जिसे मनमोहन सिंह की सरकार ने छीन लिया था।