बिंदल की टीम में संगठन को तरजीह, धूमल गुट को नहीं मिली खास तवज्जो
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प्रदेश की सियासी राजनीति में बदलावों के दौर से गुजर रही भाजपा की नई कार्यकारिणी में भी कई नए बदलाव देखने को मिले। वैसे तो डॉ. राजीव बिंदल संगठन के महारथी माने जाते हैं, इसीलिए उनकी 22 सदस्यीय कार्यकारिणी में संगठन को खासी तरजीह दी गई है। बड़ी संख्या में ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संगठन के करीबी माने जाते हैं। लेकिन इसके अलावा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के करीबियों को भी जगह मिल गई है। कभी प्रदेश भाजपा की धुरी रहे प्रो. प्रेम कुमार धूमल के करीबियों को खास तवज्जो नहीं मिल सकी है।
पार्टी की नई कार्यकारिणी पर नजर दौड़ाएं तो जवाहर लाल, ओपी चौधरी, अमित ठाकुर, राम सिंह, पुरषोत्तम गुलेरिया, विशाल चौहान, श्रेष्ठा चौधरी, मोहम्मद राजबली जैसे संगठन के लोगों को अलग-अलग स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं। वहीं, त्रिलोक जम्वाल, त्रिलोक कपूर, बिहारी लाल शर्मा, रश्मिधर सूद, कृपाल परमार को संगठन के साथ साथ जेपी नड्डा की करीबी का भी लाभ मिला है। वहीं, राकेश जम्वाल, राम सिंह, धनेश्वरी ठाकुर, पायल वैद्य, सुरेश कश्यप, राकेश शर्मा बबली को सीएम जयराम की गुडबुक में शामिल होने का दोहरा फायदे की बदौलत जगह मिली है।
वहीं, तीन बार मुख्यमंत्री रहे जिन प्रो. प्रेम कुमार धूमल के आसपास भाजपा की पूरी सियासत घूमती थी, उनकी टीम के इक्का दुक्का लोगों को ही जगह मिल सकी। प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता बने रणधीर शर्मा धूमल गुट के कहे जाते हैं लेकिन पिछले लंबे समय से वह अलग अलग गुटों के प्रदेश अध्यक्ष की कार्यकारिणी में किसी न किसी रूप में शामिल रहे। वहीं, उपाध्यक्ष बने वरिष्ठ नेता प्रवीण शर्मा का नाम शांता से लेकर धूमल गुट में शामिल किया जाता था। वहीं कोषाध्यक्ष संजय सूद और उपाध्यक्ष राम सिंह को संगठन के साथ साथ प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बिंदल का करीबी बताया जाता है।
बिंदल प्रदेश की सियासत में अब रिटायरमेंट मोड पर हैं और उनकी जगह अनुराग ले तो रहे हैं लेकिन कार्यकारिणी में उनके किसी करीबी को जगह नहीं मिली है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि बिंदल की पूरी कार्यकारिणी में सिर्फ प्रदेश की वर्तमान सियासत के बड़े नेताओं के इर्दगिर्द रहने वालों को साथ लेकर बैलेंस बनाने का प्रयास किया गया है।
लोकसभा चुनाव के बाद सोमवार को सूबे के सबसे बड़े जिले कांगड़ा ने एक और मंत्री पद खो दिया। कांगड़ा जिले में भाजपा का अगुआ नेता बनने की राह पर चले विपिन परमार को विधानसभा अध्यक्ष की संविधानिक कुर्सी पर बैठा कर हाईकमान ने प्रदेश की सियासत को बिंदल की ताजपोशी की तरह अचंभित कर दिया। परमार के अध्यक्ष बनने के बाद अब कांगड़ा में दो मंत्री पद खाली हो गए हैं।
इससे पहले जय राम कैबिनेट में सबसे वरिष्ठ मंत्री रहे कांगरा जिला के किशन कपूर को सांसद बना कर दिल्ली भेजा गया था। वर्तमान में कांगड़ा जिला में भाजपा के 4 संगठनात्मक जिलों में से देहरा और कांगड़ा से बिक्रम ठाकुर तथा सरवीन चौधरी के रूप में दो मंत्री हैं। अगर भौगोलिक सियासी गणित को तवज्जो दें तो पालमपुर और नूरपुर संगठनात्मक जिलों में से 2 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं।
नूरपुर से राकेश पठानिया के नाम पर मंत्री की चर्चा चल रही है। कैबिनेट में एक राजपूत नेता भी कम हो गया है। पालमपुर संगठनात्मक जिला में से विपिन परमार के अलावा दो भाजपा विधायक पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। इसलिए, दूसरे मंत्री पद की बाजी कांगड़ा जिला के बजाय चंबा भी मार सकता है।