जयराम; मुकेश, सुक्खू खड़ी करते रहे अपनी इमेज बिल्डिंग
निचले हिमाचल की जनता के सफेद हाथी तपोवन विधानसभा परिसर में 6 दिन तक चले शीतकालीन सत्र में धूमल कांग्रेस-भाजपा की नई पीढ़ी के नेताओं में सियासी रुतबे के लिए जद्दोजहद दिखी। पूरे शीत सत्र में नई राजनीतिक पीढ़ी सियासी इमेज बिल्डिंग करते हुए दिखी। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने पहले दिन से ही शीत सत्र को सियासी पिच बनाकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की छवि पर प्रहार किया।
पूरे सत्र में मुकेश विपक्ष में फ्रंट फुट पर खेलकर वीरभद्र सिंह का विकल्प बनने की कोशिश करते रहे। इससे इतर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पुरानी रीत को पीछे छोड़ शब्दों में सियासी शहद डालकर विपक्ष को कटघरे में घेरा भी और बीच में तारीफ कर राम राज्य का दावा कर खुद की छवि ईमानदार और मिलनसार नेता के रूप में करने की कोशिश की। वीरभद्र सिंह से राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे सुखविंद्र सुक्खू भी सदन में लगातार सरकार पर हावी रहने की कोशिश कर प्रदेश कांग्रेस का सर्वेसर्वा नेता होने का दावा करते दिखे।
सुक्खू पूरे सत्र में वीरभद्र सिंह के साथ सिर्फ आखिरी दिन ही सदन के भीतर मिले। सदन के भीतर भी दोनों में दूरियां दिखीं। तत्कालीन सरकार में विस उपाध्यक्ष रहे जगत सिंह नेगी रामराज्य की आड़ में भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर रोज मुख्यमंत्री को निशाना बनाकर ईमेज बिल्डिंग करते नजर आए। सत्तापक्ष की ओर से विपक्ष को घेरने के लिए विधायक राकेश पठानिया सियासी पिच पर रोज फ्रंट फुट पर खेलते नजर आए।
तल्ख रहने वाले वीरभद्र पूरे सत्र में रहे खामोश
सरकार की ढाल बनते हुए कभी कभी वह अपनों पर वार करने से भी नहीं चूके। शीत सत्र में पठानिया लगातार विपक्ष पर हावी रहकर मुख्यमंत्री के समक्ष उनका सबसे बड़ा शुभचिंतक होने का सियासी दावा पेश करते दिखे। विपक्ष में अनुभव पर नया जोश हावी होता दिखा। जबकि जयराम की टीम डिफेंस में बीच बीच में शॉट लगाती दिखी।
सदन में कम्युनिस्ट पार्टी से एकमात्र सदस्य राकेश सिंघा ने पूरे सत्र में लाल झंडा बुलंद रखा। सदन में हर विषय पर सरकार को तथ्यों को ढाल बनाकर घेरने की कोशिश कर अपना रुतबा बनाते दिखे।
सदन के भीतर और बाहर तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत का जोश आखिर तक नजर आया। पूरे सत्र में गाय पर भी सियासत दिखी। भाजपा ने गाय के संरक्षण को लेकर सदन में बिल लाया तो कांग्रेस विधायक ने इसको राष्ट्रमाता का दर्जा देने का प्रस्ताव लाया।
शीत सत्र में तल्ख तेवरों के लिए जाने जाने वाले वीरभद्र सिंह खामोश रहे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के खिलाफ वीरभद्र सिंह ने एक बार भी तीखा प्रहार नहीं किया। पूरे सदन में उनकी चुप्पी को लेकर कई सियासी मायने निकाले गए।