चर्चा न बहस, 10 मिनट में विधायकों, मंत्रियों का वेतन 2.10 लाख
- अब विधायक को 2.10 और मंत्री को मिलेंगे 2.35 लाख मासिक मिलेंगे
- कर्ज में डूबे हिमाचल में विधायकों और मंत्रियों का वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी
- बजट सत्र के आखिरी दिन प्रस्ताव रखते ही विपक्ष ने मिलाई ‘हां’ में ‘हां’
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विधानसभा के बजट सत्र का आखिरी दिन। न चर्चा हुई और न ही कोई सवाल उठा। 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज में डूबे हिमाचल में विधायकों, मंत्रियों के वेतन-भत्तों का विधेयक महज 10 मिनट में ही पारित हो गया। वेतन में लगभग 59 फीसदी बढ़ोतरी कर दी गई। जनता के मुद्दों पर सदन में खूब हंगामा, वॉकआउट होता है।
लेकिन जब अपने वेतन-भत्ते बढ़ाने की बारी आई तो सभी ने एक सुर में हां में हां मिलाई। प्रस्ताव पारित होने के बाद बाद विधानसभा की बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। विधायक को पहले कुल वेतन-भत्ते के रूप में लगभग एक लाख 32 हजार रुपये मासिक मिलते थे। अब ये 2.10 लाख रुपये मिलेंगे। अभी तक करीब डेढ़ लाख रुपये मासिक वेतन पाने वाले मंत्री अब लगभग 2.35 लाख रुपये मासिक लेंगे।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वीरवार को सदन में मंत्रियों, मुख्य संसदीय सचिवों, विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के भत्ते और पेंशन से संबंधित चार संशोधन विधेयक रखे। मंत्रिमंडल ने इसके लिए पिछले दिनों ही मंजूरी दे दी थी। बजट सत्र के आखिरी दिन चारों संशोधन विधेयकों को महज दस मिनट में ही पारित कर दिया।
मौजूदा सरकार ने तीसरी बार विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाए हैं। वित्त वर्ष 2015-16 के बजट सत्र के दौरान भी सरकार ने विधायकों के वेतन में डाटा ऑपरेटर भत्ते की नई व्यवस्था की थी। इसे उस समय 12,000 रुपये किया गया था। इससे पूर्व सरकार के सत्ता में आने के बाद भी विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी की गई थी।
लगभग दोगुना हुआ वेतन
विधायकों का वेतन 30,000 रुपये से बढ़ाकर 55,000 रुपये प्रति माह किया गया है। दैनिक भत्ते को 1500 रुपये से बढ़ाकर 1800 रुपये प्रतिदिन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ते को 60,000 रुपये से बढ़ाकर 90,000 रुपये, कार्यालय भत्ते को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000
रुपये प्रतिमाह, कंप्यूटर डाटा एंट्री आपरेटर भत्ते को 12,000 रुपये से 15,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। मुफ्त यात्रा सीमा को दो लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये, यात्रा अग्रिम को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है।
मंत्रियों के वेतन-भत्तों में इजाफा- मुख्यमंत्री के वेतन को 65,000 रुपये से बढ़ाकर 95,000 रुपये मासिक किया गया। कैबिनेट मंत्री के वेतन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 80,000 रुपये किया गया है। सत्कार भत्ते को 30,000 रुपये से बढ़ाकर 95,000 रुपये कर दिया गया है।
लाइसेंस फीस की कटौती वेतन के दस प्रतिशत की दर के बजाय 1,500 रुपये प्रति माह की दर से करने की बात की गई। मुफ्त यात्रा सुविधा को सीमा को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये करने और यात्रा अग्रिम को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया।
मुख्य संसदीय सचिवों को ये लाभ मिला
मुख्य संसदीय सचिवों के वेतन को 40,000 रुपये से बढ़ाकर 65,000 रुपये किया गया, जबकि संसदीय सचिवों के भत्ते 35,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये किए गए। लाइसेंस फीस को वेतन के दस प्रतिशत के बजाय 1500 रुपये प्रति माह की दर से बढ़ाया गया।
विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के वेतन-भत्ते- विधानसभा अध्यक्ष के वेतन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 80,000 रुपये और उपाध्यक्ष के वेतन को 45,000 रुपये से बढ़ाकर 95,000 रुपये किया गया है। मुफ्त यात्रा सीमा को 2 लाख से ढाई लाख रुपये किया गया। यात्रा अग्रिम को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया।
पूर्व विधायकों की मुफ्त यात्रा सीमा बढ़ाई- पूर्व विधायकों की मुफ्त यात्रा सीमा को 1,00,000 रुपये से बढ़ाकर 1,25,000 रुपये किया गया है। पेंशन को 22,000 रुपये से बढ़ाकर 28,000 रुपये किया गया है। प्रथम कार्यकाल की अवधि के अलावा प्रत्येक वर्ष के लिए अतिरिक्त पेंशन को 500 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति माह किया गया है।