मानसून सत्रः मानकों पर खरी नहीं उतर रहीं हिमाचल में तैयार दवाइयां
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हिमाचल में कई फार्मा उद्योगों में तैयार की जा रहीं दवाइयां मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। वर्ष 2017-18 में विभिन्न दवाओं के 1902 सैंपल जुटाए गए, जिनमें 42 सैंपल स्वास्थ्य महकमे के मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
इस वर्ष में अब तक 638 सैंपलों में से 8 सैंपल गड़बड़ हैं। अब स्वास्थ्य विभाग फार्मा उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक विक्रमादित्य सिंह की ओर से पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
परमार ने बताया कि वर्ष 2017-18 जिला चंबा में 133 दवाइयों के सैंपल लिए गए, इनमें 2 स्टैंडर्ड क्वालिटी के नहीं पाए गए। जिला कांगड़ा में 311 में से 24, बिलासपुर में 102 में से 4, हमीरपुर में 120 में से 1, शिमला में 116 में से 2, सोलन
में 382 में से 1, सिरमौर में 247 में से 6, मंडी में 229 में से 2 सैंपल स्टैंडर्ड क्वालिटी के नहीं पाए गए। वर्ष 2018-19 की बात करें तो अब तक जिला सिरमौर में दो और कांगड़ा, बिलासपुर, ऊना, शिमला, सोलन, और मंडी में 1-1 सैंपल स्टैंडर्ड क्वालिटी के नहीं पाए गए।
रूट न मिलने से सड़कों पर जंग खा रहीं एचआरटीसी की 241 बसें
जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत परिवहन निगम की 241 बसें रूट न मिलने की वजह से एक साल से सड़कों पर खड़ी जंग खा रही हैं। बड़ी बात यह है कि निगम और विभाग दोनों परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर के पास हैं।
लेकिन बसों को रूट न मिलना हैरत की बात है। बता दें कि हाईकोर्ट में मामला होने के कारण निगम की 325 बसें काफी समय से सड़क पर खड़ी थीं। इन बसों को क्लस्टर में चलाने के बजाए बाहरी क्षेत्रों में चला दिया था।
अब जब निगम ने हाईकोर्ट के समक्ष बस चलाने को लेकर क्लस्टर तैयार किया तो परिवहन निगम महज 84 बसें ही चला पाया जबकि अन्य बसों को रूट नहीं दिए गए।
परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने भटियात के विधायक विक्रम सिंह के लिखित प्रश्न के उत्तर में कहा कि निगम की ये बसें जल्द ही सड़कों पर दौड़ाई जाएंगी
।परिवहन निगम की ओर से दी गई जानकारी में जेएनएनयूआरएम 12 मीटर की 129 और 9 मीटर की 112 बसें सड़कों पर खड़ी हैं। इन बसों को सड़क पर खड़े हुए करीब एक साल हो गया है।
कड़े किए जाएंगे अवैध खनन और भंडारण के नियम
प्रदेश सरकार ने खनिजों के अवैध भंडारण में संलिप्त दोषियों को अब सजा देने का प्रावधान करने की तैयारी की है। पहले भंडारण में संलिप्त दोषियों से न्यूनतम 25,000 रुपये का जुर्माना और कंपाउंडिंग फीस वसूली जाती थी। लेकिन अब जुर्माना राशि बढ़ाकर 50,000 रुपये की जा रही है।
अवैध रूप से भंडारित किए गए खनिज पर बाजार के मूल्य के आधार पर जुर्माना राशि वसूली जाएगी। नए नियमों में यदि स्टोन क्रशर मालिक बिना पंजीकरण स्टोन क्रशर का संचालन करता है तो उसके खिलाफ एक वर्ष का कारावास व 50,000 तक जुर्माने का प्रावधान किया जा रहा है।
उद्योग मंत्री विक्रम सिंह ठाकुर ने यह जानकारी विधायक लखविंद्र सिंह की ओर से पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने अवैध खनन रोकने को लेकर 39 विभागों के कर्मचारियों की टीम बनाई है।
इसमें पुलिस, वन, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, राजस्व, लोनिवि आदि शामिल हैं। खनन में संलिप्त दोषियों के खिलाफ जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
अपनी ही सरकार को पठानिया ने निशाने पर रखा
हिमाचल की पर्यटन नीति को लेकर भाजपा विधायक राकेश पठानिया ने सोमवार को अपनी ही सरकार को निशाने पर रखा। नियम-130 के तहत प्रदेश में पर्यटन नीति पर चल रही चर्चा में भाग लेते हुए पठानिया ने कहा कि जयराम सरकार प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रति कितनी गंभीर है, यह इसी बात से पता चलता है कि सीएम खुद चर्चा में भाग लेने के बजाय दिल्ली रवाना हो गए।
उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों को छोड़कर शेष सभी क्षेत्र पर्यटन से अछूते हैं। एडीबी ने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1800 करोड़ और 619 करोड़ दिए, लेकिन इन पैसों का सदुपयोग नहीं हो पाया है। प्रदेश में सिर्फ शौचालयों का निर्माण हो रहा है।
पठानिया ने पर्यटन नीति पर सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े किए तो इसी दौरान सीएम अचानक सदन में पहुंच गए। जयराम ठाकुर ने पठानिया से कहा कि मैं आपको सुन रहा था। सीएम ने सदन को अवगत करवाया कि 28 को दिल्ली में अहम बैठक है। उन्हें यहां से रवाना होना पड़ रहा है।