हिमाचल विस चुनाव: कांग्रेस में घमासान, भाजपा भर रही हुंकार
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विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने प्रचार अभियान को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रही है जबकि कांग्रेस अंदरूनी घमासान के चलते बेहतर स्टार्ट के इंतजार में है। परिवर्तन रथों से चारों संसदीय क्षेत्र नापने के बाद भाजपा हर दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है।
अगले चरण में हिसाब मांगे हिमाचल के बाद 22 सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कांगड़ा में हुंकार भरेंगे। आधा दर्जन केंद्रीय नेताओं के दौरे तय हो गए हैं। यह लगभग तय है कि आचार संहिता लागू होने से पहले पीएम मोदी घोषणाओं का पिटारा लेकर हिमाचल आएंगे।
उधर, कांग्रेस में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू में अंदरूनी घमासान से पार्टी सुनियोजित प्रचार कार्यक्रम शुरू नहीं कर पा रही है। मुख्यमंत्री की जनसभाओं में भाजपा से अधिक कांग्रेस नेतृत्व पर हमले हो रहे हैं। मंत्री, विधायक अपने क्षेत्रों तक सीमित हैं।
भाजपा के केंद्रीय नेताओं के दौरे तेज, कांग्रेस हाईकमान ने मुंह मोड़ा
चुनाव निकट आते ही भाजपा ने प्रदेश में पूरी ताकत झोंक दी है। अप्रैल में प्रधानमंत्री ने शिमला के रिज से चुनावी शंखनाद किया तो पार्टी के चार परिवर्तन रथ चारों दिशाओं में प्रचार को निकल गए। शाह ने पहले प्रचार चरण का पालमपुर में खाका खींचा।
भाजपा शासित राज्यों उत्तराखंड से त्रिवेंद्र रावत, उत्तर प्रदेश से योगी आदित्यनाथ, मध्यप्रदेश से शिवराज सिंह और छत्तीसगढ़ से रमन सिंह कांग्रेस पर गरजे। इसके बाद हर विस क्षेत्र में पदयात्रा शुरू हुई। छोटे प्रचार रथ 68 सीटों में चलाए जा रहे हैं।
दलित सम्मेलन के साथ पहला चरण समाप्त हुआ। अब हिसाब मांगे हिमाचल से दूसरा चरण शुरू हो गया है। इसमें शाह कांगड़ा में चुनावी हुंकार भरने आ रहे हैं। उनका लगातार दूसरी बार कांगड़ा जिले में आना 15 विधानसभा सीटों का गणित है।
पार्टी के प्रचार से साफ है कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार और प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती के चेहरे आगे रहेंगे, जबकि सीएम का चेहरा न देकर पीएम मोदी के नाम पर चुनाव मैदान में उतरा जाना है।
अंदरूनी खींचतान में उलझी कांग्रेस
भाजपा की चुनावी रणनीति दिल्ली से ब्लू प्रिंट के हिसाब से चलती दिख रही है, जबकि कांग्रेस में प्रचार का खाका अंदरूनी घमासान में उलझा हुआ है। सुनियोजित प्रचार कार्यक्रमों में संगठन प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे के दौरों से आगे नहीं बढ़ा है। वीरभद्र सिंह हर विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, लेकिन उनके दौरों का संगठन से समन्वय नहीं दिख रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू की अध्यक्षता मुख्यमंत्री मानने को तैयार नहीं हैं तो हाईकमान उन्हें प्रदेश की कमान देने पर एकमत नहीं दिख रही। भाजपा के प्रचार कार्यक्रमों के जवाब में पीसीसी की पथयात्रा का हिस्सा सीएम नहीं बने। वे लगातार कांग्रेस नेतृत्व पर बरसते सुनाई दे रहे हैं।
कांग्रेस में वीरभद्र और सुक्खू खेमे के हाईकमान को लिखे लेटर और ई-मेल बम धमाके हो रहे हैं। सार्वजनिक मंचों पर मुख्यमंत्री भाजपा पर हमला तो कर रहे हैं, लेकिन वे सुक्खू और पार्टी नेतृत्व को लेकर दिए आक्रामक बयानों में सुनाई नहीं दे रहा है।
सुक्खू को पीसीसी पद से हटाने को हाईकमान तैयार नहीं है, अब मसला टिकटों का बचा है। मुख्यमंत्री का अपनी कैबिनेट के मंत्रियों जीएस बाली और ठाकुर कौल सिंह से मतभेदों की बात भी उभरकर सामने आई है। केंद्र के वरिष्ठ नेता अब विदेश से राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।